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अब तो माफी मांगें केजरीवाल

अब तो माफी मांगें केजरीवाल

अरविन्द केजरीवाल मुख्यमंत्री जरूर बन गए लेकिन उनकी हरकतें अभी भी उसी तरह से हैं जैसे मुख्यमंत्री बनने से पहले थी। अण्णा हजारे के आंदोलन से चर्चा में आए अरविन्द केजरीवाल ने जिस तरीके से दिल्ली में सत्ता पाई है, वह किसी से छिपी नहीं है। चर्चा में आने के लिए वे किसी भी स्तर पर पहुंच जाते हैं। दिल्ली की सत्ता हथियाने के लिए उन्होंने पहले शीला दीक्षित पर आरोप मढ़े लेकिन वे सभी आरोप बेबुनियाद ही साबित हुए। इसके बाद उन्होंने अरुण जेटली को निशाना बनाया। लेकिन उसमें में भी वे असफल ही साबित हुए। अब वे मोदी की डिग्रियों को लेकर चर्चा बटोरने में लगे हुए हैं। लेकिन जिस तरह से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह व अरुण जेटली ने मोदी की डिग्रियां सार्वजनिक की, उससे केजरीवाल अब फंसते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि अभी भी वे संतुष्ट नहीं है। लेकिन उन्हें संतुष्ट किया भी नहीं जा सकता है। अच्छा तो यह होगा कि उन्हें अमित शाह की सलाह मान लेनी चाहिए और जैसा कि अमित शाह कह रहे हैं कि उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सर्वोच्च पद पर इस समय आसीन हैं। उनकी पार्टी को देश की जनता से पूरा-पूरा समर्थन मिला हुआ है। नरेंद्र मोदी भी अपनी दोनों लोकसभा सीटों से भारी मतों से विजयी हुए थे। अन्य दलों ने भी उन्हें अपना समर्थन देकर इस देश का प्रधानमंत्री चुना था। तब किसी ने भी नरेंद्र मोदी की योग्यता को लेकर सवाल नहीं उठाए थे। सर्वसम्मति से उन्हें संसदीय दल का नेता चुना गया था। अब ऐसे में केजरीवाल प्रधानमंत्री की योग्यता को लेकर सवाल उठाकर आखिरकार इस देश की जनता को क्या जताना चाहते हैं? दरअसल अरविन्द केजरीवाल अपनी कमजोरियों को छिपाने में माहिर है, जब उन्हें लगता है कि अब देश की जनता उनसे ही उनका हिसाब लेने वाली है तब वे इस तरह के अनर्गल मुद्दे उठाकर देश की जनता का ध्यान बंटा देते हैं और उनके साथ अन्य दल भी सुर में सुर मिलाने लगते हैं। केजरीवाल को दिल्ली का मुख्यमंत्री बने दो साल से भी अधिक का समय होने को है, लेकिन अभी तक वे अपने वायदों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। न तो भ्रष्टाचार पर लगाम लगा सके हैं और न ही नौकरशाही पर पकड़ बना सके हैं। उनकी पार्टी के कई नेता फर्जी डिग्री, महिला उत्पीडऩ और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हैं।

खुद उन पर तानाशाही अंदाज में काम करने के इल्जाम हैं। फिर भी वे दूसरे दलों के नेताओं पर बिना साक्ष्य के कीचड़ उछालते रहते हैं। बहरहाल, अब भाजपा ने सप्रमाण स्थिति स्पष्ट कर दी है। इसके लिए उसके दो सर्वोच्च नेता मीडिया के सामने आए। मोदी की डिग्रियों की कॉपी पत्रकारों को बांटी। इनके मुताबिक नरेंद्र मोदी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए और गुजरात विश्वविद्यालय से एमए की डिग्री ली है। जेटली ने याद किया कि १९७५-७७ की इमरजेंसी के बाद मोदी परीक्षा देने दिल्ली विश्वविद्यालय आए थे। तब जेटली वहां छात्र नेता थे। अब बेलाग कहा जा सकता है कि इस प्रकरण में केजरीवाल ने सार्वजनिक विमर्श के स्तर को गिराया। इसके बाद केजरीवाल और इस मामले को उठाने वाले तमाम दूसरे दलों/व्यक्तियों से यह न्यूनतम अपेक्षा है कि वे भूलसुधार करें। बिना शर्त क्षमा मांगना ही इसका सर्वश्रेष्ठ तरीका है। स्थान पर

Updated : 2016-05-11T05:30:00+05:30
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