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राष्ट्रपति रौसेफ के समर्थन में राष्ट्रव्यापी रैलियां

ब्रासीलिया। ब्राजील की राष्ट्रपति दिल्मा रौसेफ की महाभियोग के खिलाफ जारी लड़ाई ने अब गति पकड़ ली है। गुरुवार देर शाम उनके हजारों समर्थकों ने राष्ट्रव्यापी स्तर पर कई स्थानों पर मार्च किया ताकि उनके अनुसार तख्तापलट की साजिश नाकाम हो।

यह रैलियों उन ठोस प्रयासों का हिस्सा है जिससे रौसेफ अपने खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया को रोक सकती हैं। सरकारी खातों में कथित छेड़छाड़ और 2014 में पुनः सत्तारूढ़ होने के बाद ब्राजील में मंदी के गहराते संकट से जुड़े आरोपों में गिरी पहली महिला राष्ट्रपति के लिये यह बड़ी राहत है ।
इसके अलावा रौसेफ के राजनीतिक संकट में उनके प्रमुख सहयोगी उग्र पूर्व राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा को गुरुवार शीर्ष अदालत से बड़ी राहत मिली। इसके तहत उनके खिलाफ जारी भ्रष्टाचार की न्यायिक जांच प्रक्रिया अब सर्जियो फर्नांडो मोरो के हाथ से निकल कर उच्च न्यायालय के हाथ में पहुंच गई है।

गुरुवार को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों में से कईयों ने रौसेफ की वर्कर पार्टी के लाल झंडे लहराये। उनके समर्थक 31 शहरों जिसमें ब्रासीलिया, रियो डी जनेरियो, साओ पाउलो और रेसिफ़ शामिल है में एकत्र हुए और मार्च निकाला।
ग्लोबो समाचार साइट के हवाले से पुलिस का अनुमान है कि 1,10,000 से अधिक लोग इन रैलियों में शामिल हुये। वहीं आयोजकों का दावा लगभग 6 लाख का है। ब्रासीलिया में बड़ी रैली में पुलिस के हवाले से एएफपी ने बताया कि कम से कम 25,000 से 30,000 लोगों मार्च किया। इस दौरान सबसे लोकप्रिय नारा था ‘षड़यंत्र को न कहो’।

वहीं सूचना यह भी है कि पूर्व राष्ट्रपति लूला ने भी ब्राजीलिया में आयोजित रैली में हिस्सा लेना था लेकिन आखिरी समय में उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसके पीछे का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। हाल ही में भ्रष्टाचार के मामले में घिरी ब्राजील की पहली महिला राष्ट्रपति दिल्मा रौसेफ का साथ देश की सबसे बड़ी पार्टी ‘द फ्रेकटिएश ब्राजील डेमोक्रेटिक मूवमेंट’ ने छोड़ दिया है। इससे राष्ट्रपति रौसेफ के खिलाफ महाभियोग चलाये जाने की संभावना बढ़ गई है। संभावना है कि कांग्रेस मई तक उन्हें कार्य से निलंबित कर दे ताकि सीनेट उनकी स्थाई बरखास्तगी पर विचार कर सके।

उनके बाद देश की कमान उपराष्ट्रपति मिचेल टेम्बर पीएमडीबी नेता के हाथ में चली जायेगी। टेम्बर का कहना है कि वह चाहते हैं कि महाभियोग की प्रक्रिया तेज हो और उन्हें जिम्मेदारी मिले ताकि व्यापार जगत में फिर से देश की आर्थिक स्थिति को सुधरने का विश्वास पैदा हो।
वहीं राष्ट्रपति रौसेफ ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है और महाभियोग के प्रयासों को उनकी श्रमिक पार्टी (पीटी) को सत्ता से बेदखल करने की साजिश बताया है।

उल्लेखनीय है कि ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा के विरुद्ध भ्रष्टाचार की जांच ने देश में राजनीतिक संकट पैदा कर दिया है। जांचकर्ताओं का आरोप है कि अवैध रूप से एक सरकारी कंपनी पेट्रोब्रास से धन की निकासी की गई और आवास खरीदा गया जिसे लूला और उनकी पार्टी राजनीतिक षड्यंत्र बता रही है।
यह घोटाला लूला तथा उनकी उत्तराधिकारी वर्तमान राष्ट्रपति दिल्मा रौसेफ के वामपंथी राजनीतिक दल, वर्कर्स पार्टी बनाम कई दलों सहित लोकप्रिय जनआंदोलनों से निर्मित विपक्ष के बीच एक भीषण राजनीतिक संघर्ष का केंद्र भी बन चुका है।
रौसेफ को पदच्युत करने की मांग को लेकर सरकार विरोधी समूहों ने 13 मार्च को प्रदर्शन किया था। इसी बीच अर्थव्यवस्था में गिरावट को रोक पाने में असफल रहने के लिए भी विपक्ष राष्ट्रपति दिल्मा रौसेफ से पद छोड़ने की मांग कर रहा है।
आरोप है कि 2014 में राजकोषीय घाटे की सही रकम छिपाने के लिए लेखा कार्य से जुड़ी तिकड़मों का सहारा लिया गया । वहीं दूसरी ओर निर्वाचन अदालत इस आरोप की छानबीन कर रही है कि क्या 2014 में रौसेफ के पुनर्निर्वाचन मुहिम के लिए पेट्रोब्रास तेल कंपनी से पैसे निकाले गये थे। ऐसा पाया गया, तो अदालत उस निर्वाचन को रद्द कर फिर से निर्वाचन का आदेश दे सकती है जिसके बाद वर्कर्स पार्टी के किसी उम्मीदवार की हाल लगभग निश्चित है।

Updated : 1 April 2016 12:00 AM GMT
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