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तानाशाही की शिकायत भोपाल तक पहुंची

निगमायुक्त को निर्देश, हद में रहें!

ग्वालियर। नगर निगम द्वारा शहर में पिछले कुछ दिनों से चलाई जा रही अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान दुकानदारों से लेकर राहगीरों से मारपीट और अभद्रता की शिकायत भोपाल तक पहुंच गई है। इसके साथ ही वहां से निगमायुक्त को सख्त हिदायत मिल गई है कि वे मनमानी और तानाशाही न करते हुए अपनी हद में रहकर काम करें।
उल्लेखनीय है कि निगमायुक्त अनय द्विवेदी के निर्देशन में इन दिनों शहर के विभिन्न क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाया जा रहा है, लेकिन इस दौरान जो व्यवहार दुकानदारों से किया जा रहा है उसके चर्चे पूरे शहर में हैं। अपने साथ भारी पुलिस बल और मदाखलत कर्मियों का काफिला लेकर चल रहे निगमायुक्त श्री द्विवेदी यह नहीं देख रहे कि कौन सी दुकान मकान अतिक्रमण में है बल्कि कतार में जो आ रहा है, उसे ही धराशायी करते चल रहे हैं। इतना ही नहीं यदि कोई व्यक्ति इसका कारण पूछ लेता है अथवा थोड़ा समय मांगता है उस पर श्री द्विवेदी के आदेश पर उनकी सेना लाठी-डंडे चलाना शुरू कर कर देती है। सूत्र बताते हैं कि निगमायुक्त की इस मनमानी और तानाशाह पूर्ण कार्रवाई की शिकायत भोपाल तक पहुंच गई है। इसके बाद वहां से श्री द्विवेदी को हिदायत दी गई है कि वे अपनी मनमानी न करते हुए हद और नियमों के अनुसार कार्य करें। स्वदेश ने उनकी इस कार्रवाई को लेकर अपने 5 फरवरी 2016 के अंक में न्यायालय के आदेश की आड़ में निगम की गुण्डागर्दी शीषक से एक खबर भी प्रकाशित की थी जिसके बाद भोपाल से आज यह संदेश आ गया।
न्यायालय के आदेश की आड़
उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले न्यायालय ने एक याचिका पर यह आदेश दिए थे कि शहर से प्रतिदिन अतिक्रमण हटाया जाए। इसमेें मूल रूप से सड़कों के बीच में लगे बिजली के खम्बे हटाने की बात की गई थी। वहीं न्यायालय की गाइड लाइन यह भी थी कि ऐसे अतिक्रमण प्रतिदिन हटाएं जो कि एक बार हटाने के बाद पुन: कर लिए जाते हैं। इसमें याचिकाकर्ता ने मुख्य रूप से बाड़ा और दत्तमंदिर के आसपास किए गए अतिक्रमण को हटाने की गुहार की गई थी लेकिन इसकी आड़ में शहर में जिस हिसाब से अतिक्रमण हटाया जा रहा है वह निगमायुक्त की तानाशाही प्रवृत्ति को दर्शाता है। जबकि जिन स्थानों से अतिक्रमण हटना चाहिए वहां आज भी अतिक्रमण दिखाई दे रहे हैं।
नियम विरुद्ध तन गईं बड़ी-बड़ी इमारतें
हालांकि यह सही बात है कि अतिक्रमण शहर के विकास और यातायात में बाधक होता है इसलिए इसका हटाया जाना आवश्यक है,लेकिन इसमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि क्या कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है। यदि नहीं तो फिर इससे किसी व्यक्ति का बेजा नुकसान तो नहीं हो रहा। लेकिन इस सब पर ध्यान न देते हुए इन दिनों निगम अमला जो कार्रवाई कर रहा है उसमें मनमानी और गुण्डागर्दी की जा रही है। जबकि शहर में अनेक ऐसे स्थान हैं जहां कि आज भी बिना अनुमति और नियम विरुद्ध निर्माण किए जा रहे हैं। उनकी ओर निगम का ध्यान आज तक नहीं गया।
पहले के चिन्हित अतिक्रमण आज भी नहीं हटे
जहां तक अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई की बात है तो कुछ वर्ष पहले विभिन्न स्थानों पर अतिक्रमणों पर लाल निशान लगाए गए थे। वे अतिक्रमण आज भी कायम हैं। इनमें फालका बाजार स्थित एक मिशनरी स्कूल और एक पूजा स्थल के साथ ही न्यायालय के आदेश के बावजूद आज तक कम्पू क्षेत्र में एक समुदाय विशेष के धर्मस्थल को आज तक नहीं तोड़ा गया।

Updated : 2016-02-06T05:30:00+05:30
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