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फरवरी में ही बनने लगे जलसंकट के हालात, जिले भर में गंभीर होते हालात

सिंध में 15 दिन का पानी शेष, 20 दिन में 60 फिट तक गिरा जलस्तर गर्मियों में बूंद-बूंद के लिए हो सकती है मशक्कत

गुना। शहर के करीब ढाई लाख कंठों को तर करने में मददगार साबित होती जीवनदायिनी सिंध नदी में महज 15 दिन का पानी शेष रह गया है। इसके बाद शहर में पेयजल आर्पूति पूरी तरह नगर पालिका के सिंध और शहर में लगे सैकड़ों ट्यूबवैलों पर ही आश्रित हो जाएगी, दूसरी तरह जलस्तर के हालात यह है कि पिछले 20 दिन में 60 फीसदी तक जलस्तर गिर चुका है। इसके चलते ट्यूबवैल भी कितने समय तक साथ दे पाएंगे, कहना मुश्किल है? यहीं स्थिति जिले के तहसील एवं ग्रामीण अंचलों की भी है, यहाँ भी जलस्तर 50 से 55 फिट तक नीचे जा चुका है। यानि गुना नगर के साथ पूरे जिले में गंभीर जलसंकट दस्तक दे रहा है। जो दिन पर दिन विकराल रुप लेता जा रहा है। इसके चलते भीषण गर्मी के दौर में हालात त्राही-त्राही वाले बन सकते है। हालांकि ऐसी स्थिति न बने इसको लेकर नगर पालिका और जिला प्रशासन दोनों गंभीर बने रहकर प्रयास करने में लगे हुए है।
10 ट्यूबवैल सूखे, 100 सूखने की कगार पर
तेजी से नीचे जाते जलस्तर ने जलसंकट की समस्या को गंभीर रुप देना शुरु कर दिया है। पिछले 20 दिन में 60 फिट नीचे जलस्तर चला गया है। जनवरी में 400 फिट के लगभग का जलस्तर 450 के आंकड़े को छूने लग गया है। इसके चलते नपा के 10 ट्यूबवैल साथ छोड़ चुके है, वहीं 100 के करीब ट्यूबवैल सूखने की कगार पर पर आ चुके है, जानकारों के मुताबिक इनमे से 50 ट्यूबवैल किसी भी समय पानी उगलना बंद कर सकते है। इसके बाद हालात और गंभीर रुप अख्तियार कर लेंगे। हालात की गंभीरता को नगर पालिका ने भी समझा है और वह ट्यूूबवैलों में पाईप बढ़ाने लग गई है, साथ ही अधिक जलसंकट वाले क्षेत्रों में नए ट्यूबवैल खनन की तैयारी की जा रही है।
50 ट्यूबवैल कभी भी छोड़ सकते है साथ
बताया जाता है कि सूखने की कगार पर पहुँचे 50 ट्यूबवैल कभी भी पानी उगलना बंद कर सकते है। इनमें बेहद कम पानी आ रहा है। ऐसे में नपा द्वारा इन ट्यूबवेलों की सप्लाई को दूसरे ट्यूबवेलों से जोड़कर सप्लाई की व्यवस्था बनाने की कोशिश की जा रही है। इसके साथ ही शहर के अधिक गंभीर जलसंकट वाले इलाकों में टैंकरों के माध्यम से पानी आर्पूति की जा रही है। शहर के बांसखेड़ी, आदर्श कॉलोनी, घोसीपुरा, कुसमौदा, बरवटपुरा, बूढ़े बालाजी, कैंट, गुलाबगंज, श्रीराम कॉलोनी, भगत सिंह कॉलोन, ए रसीद कॉलोनी, भुल्लनपुरा, बीजी रोड और सिसौदिया कॉलोनी में जलसंकट है।
जिले भर में है गंभीर संकट
पानी का संकट गुना के साथ ही पूरे जिले में है। शासन की ओर से जिले को सूखाग्रस्त घोषित किया है। इसके लिए शासन से सहायता भी मांगी गई है, वहीं जिले में बोरिंग मशीनों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह बात अलग है कि फिर भी धरती के सीने को अवैध रुप से छलनी करने का क्रम निरंतर जारी बना हुआ है। लगातार ट्यूबवैल खनन एवं नदी, तालाबों से सिंचाई के लिए होती पानी की चोरी के कारण भी हालात अधिक गंभीर रुप में सामने आ रहे है। जानकारों का मानना है कि समय रहते अगर गंभीरता के साथ योजना बनाकर प्रयास अमल में नहीं लाए जाते है तो भीषण गर्मी के दौरान में बूंद-बूंद की मशक्कत शुरु होगी।
बमौरी में 200, चांचौड़ा में 150 फिट गिरा जलस्तर
गुना शहर के साथ ही तहसील एवं ग्रामीण अंचल में भी जलस्तर लगातार गिर रहा है। बमौरी में जहाँ पानी 200 फिट नीचे जा चुके है तो चांचौड़ा में 150 फिट तक जलस्तर गिर चुका है। इसके साथ ही आरोन, राघौगढ़ में भी पानी का स्तर लगातार गिरता जा रहा है।
खास-खास
2.50
लाख लोगों को होती है सिंध और ट्यूबवैल के माध्यम से पानी की आर्पूति
385
ट्यूबवैल से नगर पालिका करती है शहर में पानी आर्पूति
65
लीटर पानी शहर में प्रतिदिन आर्पूति किया जाता है।
10
ट्यूबवैल अब तक छोड़ चुके है साथ
100
ट्यूबवैलों में नपा बढ़ा रही है पाईप

Updated : 18 Feb 2016 12:00 AM GMT
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