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सौर ऊर्जा विद्युत व नवकरणीय ऊर्जा महकमों का कार्यक्षेत्र होगा तय

भोपाल। सौर ऊर्जा को अभियान के रूप में प्रोत्साहित करने से पहले राज्य सरकार ऊर्जा व नवकरणीय ऊर्जा विभाग के बीच कामकाज का दायरा तय करेगी। दरअसल बिजली कंपनियों को आशंका है कि जैसे-जैसे सोलर एनर्जी का दायरा बड़ेगा, उसका राजस्व कम होता जाएगा। ऊर्जा विकास निगम के जरिए अप्रैल से सोलर पावर प्लांट लगाने की तैयारी है।
उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक सोलर मॉडल को बड़ावा देने नवकरणीय ऊर्जा विभाग ने सब्सिडी वगैरह का जो मॉडल तैयार किया है, उससे बिजली कंपनियां सशंकित हैं। विद्युत विभाग ने नुकसान-बिजली चोरी आदि का हवाला देते हुए कहा है कि नए मॉडल से उसके थर्मल पॉवर प्लांट्स और नुकसान में चले जाएंगे। लिहाजा महीनेभर में दोनों विभागों की आधा दर्जन बैठकों में इस मॉडल पर चर्चा हुई है। मुख्यमंत्री और मुख्यसचिव भी दोनों महकमों के अफसरों से बात कर चुके हैं। यह तय हुआ है कि दोनों विभागों के बीच कामकाज के क्षेत्र तय किए जाएं। इसके लिए नीति बनाने की कवायद हाल में शुरू हुई है। फरवरी अंत तक नीति तय हो जाएगी, इस पर कैबिनेट की मंजूरी के बाद ऊर्जा विकास निगम सरकारी दफ्तरों व निजी संस्थानों में सोलर पावर प्लांट स्थापित करेगा।
प्रधानमंत्री की मंशा
सोलर एनर्जी पीएम की मंशा से सीधी जुड़ी है। वे राज्यों को लगातार इसे प्रोत्साहित करने व उत्पादन बड़ाने पर जोर दे रहे हैं। केरल, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा इस मामले में तेजी से कदम बड़ा रहे हैं, लेकिन मप्र में यह मामला आगे नहीं बड़ पा रहा है।
उपभोक्ता सोलर मॉडल के लिए उत्सुक
मप्र में बड़े व संस्थागत बिजली उपभोक्ता इस मॉडल में रुचि दिखा रहे हैं, क्योंकि इससे उन्हें प्रति यूनिट तीन रुपए तक बचत होगी। बिजली विभाग 7 रुपए यूनिट बिजली बेचता है। भोपाल में ही मानव संग्रहालय, जिला अदालत, मंत्रालय, पुलिस मुख्यालय, भौंरी स्थित कई शिक्षा संस्थान सोलर प्लांट्स लगाने के लिए नवकरणीय ऊर्जा विभाग को रजामंदी दे चुके हैं।
35 फीसदी सब्सिडी
सोलर प्लांट की लागत में केंद्र सरकार 15 फीसदी व राज्य सरकार 20 फीसदी सब्सिडी देगी। 65 फीसदी लागत रेस्को यानी रिन्यूअल इनर्जी सर्विस कंपनी लगाएगी, जो ऊर्जा विकास निगम का ही हिस्सा होगी। एक किलोवाट का सोलर पावर प्लांट चार-पांच यूनिट प्रतिदिन व सौ किलोवाट का सोलर प्लांट चार सौ यूनिट बिजली प्रतिदिन पैदा करने में सक्षम होगा। एक किलोवाट के प्लांट की लागत लगभग एक लाख रुपए है। रेस्को उन संस्थानों की छत पर अपने खर्च पर सोलर प्लांट लगाकर बिजली आपूर्ति भी करेगी, जिनके पास बजट नहीं है। एवज में कंपनी लगभग 4 रुपए प्रति यूनिट शुल्क लेगी व प्लांट संचालन-देखरेख का जिम्मा लेगी।

Updated : 2016-02-17T05:30:00+05:30
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