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'सीमा पर खड़े जवान, हथेली पर रखे प्राण'

भांडेर। हम समझे जुगनू को हकीकत, सूरज से हमनें मुंह फेरा. उक्त पंक्तियॉं युवा साहित्यकार अनुराग शर्मा राग ने रामकिशोर अग्रवाल के निवास पर आयोजित अखिल भारतीय साहित्य परिषद की मासिक काव्य गोष्ठी में पाश्चात्य संस्कृति पर व्यंग्य करते हुए पढ़ी तो श्रोतओं ने तालियॉ बजाकर स्वागत किया।

गोष्ठी की अध्यक्षता पूर्व बीएमओ डॉ पी एल परिहार ने की। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ बसंत सोनी उपस्थित रहे। कवि राधाबल्लभ पाण्डेय सागर ने गजल में शेर पढते हुए कहा ' कल को दुनिया ये कहेगी कि उड़ गया पंक्षी, छोड़ के मौत का घर थोड़ी दूर और चलो। वहीं लालजी योगी ने बसंत का चित्रण करते हुए कहा गोकुल ग्वालन गैल गैल में, हरे हरे से हारन, अब रित आई बसंत बहारन। चेतराम चेतन ने बुंदेली कविता में व्यंग्य करते हुए कहा ' न पहराओ खाल शेर की बलि के बकरा हैं, तुम ओरन कों सुनो दाऊजी चुन के ककरा है। वहीं जयराम राहुल ने खेतन कहे कपास, काए जो हमें दओ वनवास। अमरसिंहराव दिनकर ने सीमा पर खडे जवान, हथेली पर रखे प्रान। देश भक्ति की रचना पढी। गोष्ठी का संचालन अनुराग शर्मा राग ने और आभार रामकिशोर अग्रवाल द्वारा व्यक्त किया गया।

Updated : 2016-02-16T05:30:00+05:30
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