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कमजोर शरीर को बीमारियां बनाती हैं अपना घर : रविकांत

विश्व एड्स दिवस पर संगोष्ठी, नुक्कड़ नाटक व पोस्टर प्रतियेागिता का हुआ आयोजन

झांसी। एड्स यद्यपि एक भयावह तथा लाईजाज बीमारी है तथा इसका अभी तक कोई कारगर उपाय नहीं मिल पाया है, परन्तु फिर भी इसके प्रति जागरूकता उत्पन्न कर इससे बचाव किया जा सकता है। यह विचार आज जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रविकांत ने व्यक्त किये।

डॉ. रविकांत ने एड्स के प्रति उपस्थित जनों को आगाह करते हुए कहा कि यदि गर्भावस्था के दौरान किसी मां को एड्स हो जाता है तो उसे विशेषज्ञों की सलाह लेने चाहिए। बच्चों का प्रसव नार्मल नहीं कराना चाहिए। बच्चे को स्तनपान नहीं कराना चाहिए। नवजात बच्चे का पालन पोषण डॉक्टरों की देखरेख में कराना चाहिए। स्वास्थ्य पर मीडिया की जागरूकता का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया के कारण ही स्मॉल-पॉक्स, चिकिन पॉक्स व पोलियो जैसी कई घातक बीमारियां जड़ से समाप्त हो सकीं हैैं। इस दौरान उन्होंने नवजात शिशु के विभिन्न चरणों के बारे में में बताते हुए उस दौरान एड्स से कैसे बचा जाए इसका विश्लेषण किया।

अन्धविश्वास पर अपने विचार रखते हुए डॉ. रविकांत ने कहा कि ग्रामीण व शहरी इलाकों में कुछ लोग आज भी झाड़ा-फूंकी पर विश्वास करते हैं। पर इससे बीमारियां ठीक नहीं होती हैैं। यह सिर्फ एक अंधविश्वास या भ्रम है। वर्तमान परिदृष्य की लालन-पालन की स्थिति का बखान करते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों को चिप्स, मैगी व कुरकुरे आदि जंक फूड के सेवन से बचाना चाहिए।

जनंसचार एवं पत्रकारिता के छात्र छात्र वासुदेव शरण दुबे ने कहा कि मीडिया का कार्य होता है भ्रान्तियों का खण्डन करना। बड़े-बूढ़ों की बातों में कुछ हद तक ही सच्चाई होती है। पर यह सार्वभौमिक सत्य नहीं है। रातों-रात बाल लम्बे हो जाना, एक सप्ताह में गोरापन, महीने भर में बढ़ाए दो गुना तक वजन आदि सभी मीडिया में प्रचारित की जाती हैं। यह मीडिया के दोहरेपन को भी प्रदर्शित करता है। समाज के आदर्श माने जाने वाले नायक-नायिकाएं ही ऐसे विज्ञापनों को करते हैं।

वहीं एड्स पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि लोग इसे छूआछूत व संक्रामक रोग भी मानते हैं। इस दौरान उमेश शुक्ला, रवि मिश्रा व डॉ. मुहम्मद नईम ने भी अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का संचालन मेघा झा ने एवं आभार पत्रकारिता संस्थान के विभागाध्यक्ष डॉ. सीपी पैन्यूली ने व्यक्त किया।

Updated : 2016-12-02T05:30:00+05:30
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