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हवा में घुल रहे जहर को लेकर शहरवासी चिंतित,प्रदूषण बोर्ड बेफिक्र

हवा में घुल रहे जहर को लेकर शहरवासी चिंतित,प्रदूषण बोर्ड बेफिक्र


ग्वालियर,वरिष्ठ संवाददाता / अरविन्द माथुर। दिल्ली और एनसीआर के बाद वातावरण में फैली जहरीली हवा और प्रदूषण का असर कहीं शहर पर भी तो नहीं होगा इसे लेकर जहां शहरवासी चिंतित हैं, वहीं इस पर नजर रखने के लिए जिम्मेदार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस ओर से पूरी तरह लापरवाह बना हुआ है। स्थिति यह है कि बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को वर्तमान में शहर में वायु प्रदूषण की मात्रा, मानक और आंकड़ों की वास्तविक जानकारी तक नहीं है।

उल्लेखनीय है कि आतिशबाजी चलने से दीपावली के बाद आमतौर पर ध्वनि और वायु प्रदूषण की मात्रा बढ़ जाती है जो कि लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर डालती है। लेकिन देश की राजधानी दिल्ली में इस बार अचानक ही यह प्रदूषण इतना बढ़ गया जिससे कि लोगों को अपने आसपास देखने में ही नहीं बल्कि इस जहरीली हवा में सांस तक लेने में दिक्कत होने लगी है। हालांकि इसे लेकर सभी चिंतित हैं और यह मंथन चल रहा है कि यह प्रदूषण आतिशबाजी का ही नहीं बल्कि वाहनों व लगातार बढ़ती जा रही गंदगी के साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर कचरे के ढेर को जलाने और अनुपयोगी फसलों को जलाए जाने सहित अन्य कारणों से भी हो सकता है।

आतिशबाजी का प्रदूषण मान कर झाड़ा पल्ला:-

इधर क्षेत्रीय प्रदूषण बोर्ड के लग ाग आठ दिन पहले जारी आंकड़ों की बात करें तो दीपावली के दिन या उसके बाद शहर मेें वायु प्रदूषण की मात्रा तीन गुना से भी अधिक हो गई थी। यदि बोर्ड की मानें तो इससे पहले इसका स्तर पीएम 10 था जिसे कि सामान्य कहा जा सकता है। लेकिन दीपावली के बाद यह खतरनाक स्थिति अर्थात सामान्य स्तर 10 पीएम को पार करते हुए 274 माइक्रोग्राम घन मीटर पर पहुंच गया। प्रदूषण बोर्ड ने इसे आतिशबाजी से बढ़ा हुआ मान कर पल्ला झाड़ लिया लेकिन इसके बाद जब दिल्ली में अचानक छाई धुंध और प्रदूषण के कारण वातावरण में फैली जहरीली हवा से जहां पूरे देश के साथ ही शहरवासी चिंतित हैं वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय इस ओर से पूरी तरह लापरवाह बना हुआ है।

शहर की हवा हुई जहरीली

यदि जानकारों की मानें तो फिलहाल दिल्ली में हुए वायु प्रदूषण का असर शहर पर दिखाई नहीं दे रहा है। लेकिन दीपावली की रात तथा इसके दूसरे दिन अवश्य ही आतिशबाजी के प्रदूषण का असर शहर के वातावरण में स्पष्ट झलक रहा था। इसके चलते सुबह के समय धुंध सी दिखाई दे रही थी। लेकिन मौसम साफ होने तथा लगातार धूप खिलने के कारण यह अधिक नुकसानदायक साबित नहीं हुआ, वहीं यह भी सही है कि इसके कारण अस्थमा, आंखों में जलन, घबराहट और सांस की बीमारी से सबन्धित मरीजों को इस दौरान अवश्य ही परेशानी हुई। इसके चलते अस्पतालों और निजी क्लीनिकों पर मरीजों की स या में भी इससे बढ़ोतरी हुई।

स्वास्थ्य पर होता है विपरीत असर:-

डब्ल्यूएचओ द्वारा निर्धारित मानक के अनुसार 24 घंटे में वातावरण में पीएम 10 की मात्रा सौ माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होना चाहिए। लेकिन यदि यह आंकड़ा इससे अधिक होता है तो इसका स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।


ऑटो-टैम्पो छोड़ रहे हैं जहरीला धुआं

शहर में प्रदूषण की समस्या विकराल रूप लेती जा रही है। इस समय लगभग दस हजार से अधिक ऐसे टै पो और ऑटो चल रहे हैं जो कि वातावरण में जहर घोलने का काम कर रहे हैं। परिवहन विभाग की लापरवाही के कारण सही फिटनेस नहीं होने के बावजूद यह धड़ल्ले से शहर की सडक़ों पर दौड़ रहे हैं और दिन रात जहरीला धुंआ फैला रहे हैं। स्थिति यह है कि इस प्रदूषण के कारण पड़ाव, स्टेशन और अन्य क्षेत्रों में तो शाम के समय धुंध जमा हो जाती है, यहां तक कि इस दौरान थोड़ी दूर की भी वस्तु साफ दिखाई नहीं देती। सूत्रों के अनुसार वर्तमान में शहर में एक हजार से अधिक टै पो और नौ हजार से अधिक ऑटो का संचालन किया जा रहा है। वहीं इनमें से कई तो अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं।

इनका कहना है

अभी हमारे पास लेटेस्ट आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए मैं जानकारी नहीं दे सकूंगा, बाद में बात करें।

एन.पी.सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी
मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

ध्यान रखने योग्य...

"सावधानी की आवश्यकता"

इस स्थिति में वातावरण में धूल के कण बढ़ जाने से आखों में लालपन और पानी आने की शिकायत हो सकती है। इससे किसी प्रकार का खतरा या घबराने की बात नहीं है। ऐसी स्थिति में बेहतर यह है कि बाहर से आने पर आंखों को साफ पानी से धोकर साफ कर लें। घर से बाहर निकलने विशेष रूप से मोटरसाइकिल आदि पर जाते समय चश्मा लगाएं। यदि फिर भी आंखों में जलन हो रही है अथवा कीचड़ आ रही है तो विशेषज्ञ की सलाह पर आई ड्रॉप्स का उपयोग करें।

डॉ. डीके शाक्य
नेत्र रोग विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक

गजराराजा चिकित्सा महाविद्याल



" मास्क का करें उपयोग "

वायु प्रदूषण या फॉग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इससे अस्थमा, फेंफडों का कैंसर आदि बीमारियां हो सकती हैं। इससे बचाव के लिए बेहतर है कि हम मास्क का उपयोग करें। वहीं अधिक भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में जाने पर अधिक सावधानी रखें।

डॉ. मनीष शर्मा
एमडी

शहरवासी...

दीपावली के बाद से ही शहर का मौसम कुछ अलग ही है। समझ में नहीं आ रहा कि रोज सुबह इतना धुंआ कहां से आ जाता है। सुबह के समय मेरी तो सांस ही फूलने लगती है।

पुष्पा भार्गव

दिवाली के बाद से ही आसमान में छाया हल्का धुआं सुबह के समय आंखों में काफी जलन पैदा करता है। जिसके चलते सिर में भारी पन भी महसूस होने लगा है।

ओम प्रकाश


Updated : 2016-11-08T05:30:00+05:30
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