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क्या है मुलायम और अमर के बीच का राज

*प्रमोद पचौरी

उत्तर प्रदेश में मची सपा कुनबे की कलह के कारण समाजवादी पार्टी व प्रदेश की अखिलेश सरकार संकट के बुरे दौर से गुजर रही है। पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव अपने बयानों को लेकर लगातार सवालों के घेरे में है। वे सरकार और पार्टी दोनों को किरकिरी करवा रहे हैं। वे कभी मंत्रियों को बाहर करवा रहे हैं तो कभी अंदर। यही हाल पार्टी का है जिसके कारण कई नेता अंदर-बाहर हो रहे हैं। अमर सिंह को बार-बार भाई कहकर उन्हें ऐसा मददगार बता रहे हैं जिन्होंने मुलायम सिंह को जेल जाने से बचाया। बड़ा सवाल है आखिर मुलायम सिंह का कौन सा ऐसा अपराध है जिसके कारण वो जेल जाने वाले थे? फिर जिस अमर सिंह की वह बड़े-बड़े मंचों से दुहाई दे रहे हैं तो सवाल अमर सिंह की हैसियत को लेकर भी उठता है कि आखिर कौन है यह अमर सिंह? क्या वह संविधान से भी बड़ी कोई संस्था हैं? भारत के राष्ट्रपति हैं? उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश है मुख्य न्यायाधीश? या फिर भाग्यविधाता। मुलायम सिंह यादव सपाई कुनबे को जोड़े रखने के लिए बार-बार क्यों अमर सिंह की कृपा को बयान के जरिए दोहरा रहे हैं? देश की न्याय व्यवस्था को इस बयान को संज्ञान में लेना चाहिए कि आखिर माजरा क्या है?

मुलायम सिंह और अमर सिंह के बीच ऐसा कौन सा राज है जो अपराध की श्रेणी में आता है? अगर अपराध है तब क्यों अमर सिंह ने उन्हें बचाया इन कारणों का पता लगाया जाना चाहिए। मुलायम सिंह के लिए अमर सिंह आज इतने बड़े भाई हो गए कि अमर सिंह की खातिर वह किसी को भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा सकते हैं। रामगोपाल यादव इसी कड़ी का एक हिस्सा हैं।
देश के लिए यह विडंबना ही है कि सत्ता के दलालों को कहीं न कहीं से तरजीह मिल ही जाती है। ये वो दलाल है जो जरा सा छेद पाकर घुस तो जाते हैं फिर मौका मिलते ही खाइयां चौड़ी करते हैं। यूपीए-1 और यूपीए-टू के कार्यकाल में में ऐसे ही दलालों की दसों बदनामियां रही हैं। तभी सोचने को मजबूर हुआ जा रहा है कि लायक बेटे को किस तरह नालायकों की संगत में ढ़लने को कहा जा रहा है। यह लायक के साथ कैसा नालायकी वाला व्यवहार? देश में कौन सा बुद्धिजीवी मुलायम सिंह के इस वक्तव्य पर गर्व करेगा कि अमर सिंह उनके भाई है वे किसी भी सूरत में अमर सिंह व शिवपालसिंह का साथ नहीं छोड़ेंगे। न छोड़ें साथ पर अखिलेश यादव पर वे क्या थोपना चाहते हैं? शायद यही कि बड़े कानों में जब बात भर दी जाती है तो बेटे का निष्कासन तय हुआ मान लिया जाता है। मुलायम सिंह ने महाबैठक में जो तेवर दिखाए वे चक्रव्यूह में फंसे अखिलेश यादव के लिए आखिरी निर्णायक घेरा है। देखना अखिलेश यादव इससे कैसे पार पाते हैं?

Updated : 2016-10-26T05:30:00+05:30
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