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संपादकीय

ऐसे परीक्षणों पर अंकुश जरूरी


उत्तर कोरिया द्वारा बुधवार को हाइड्रोजन बम का परीक्षण किए जाने के बाद पूरा विश्व उसके इस कदम को लेकर चिंतित है। इसका असर जब उसके आसपास के देशों सहित कुछ अन्य राष्ट्रों में भूकम्प के रूप में दिखाई दिया तो उससे सटे देशों जापान, दक्षिण कोरिया और यूएन ने आनन-फानन में इस पर विचार-विमर्श के लिए आपात बैठक बुला ली। इतना ही नहीं कोरिया के मित्र राष्ट्र चीन सहित विभिन्न देशों ने इसकी आलोचना करने के साथ ही इस पर प्रतिबंध लगाए जाने पर अहम् चर्चा की। उधर अमेरिका ने उसके इस परीक्षण को संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्तावों का उल्लंघन बताया तो भारत ने इसे अत्यन्त चिंताजनक कहा। भले ही पूरा विश्व इसकी आलोचना और विरोध कर रहा हो लेकिन सबसे अधिक चिंता की बात तो यह है कि उत्तर कोरिया ने इस बम का परीक्षण उस स्थिति में किया है जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने वर्ष 2006 में उसके पहले परमाणु परीक्षण के समय से ही उस पर प्रतिबंध लगा रखा है। इस स्थिति में बुधवार को किए गए हाइड्रोजन बम के परीक्षण के बाद न्यूयार्क में की गई उस घोषणा का भी कोई औचित्य नजर नहीं आता जिसमें कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की बात की गई है। क्योंकि यहां सोचने वाली बात यह है कि सुरक्षा परिषद इस स्थिति में आखिर क्या कार्रवाई करेगी! इस बम के परीक्षण को लेकर चिंताजनक जो खबरें सामने आ रही हंै उसके अनुसार परीक्षण के लिए गैस सेंट्रीफ्यूजिस और अधिकतर मशीनरी की डिजाइन उत्तर कोरिया को पाकिस्तान से मिले हैं। वहीं इसके बदले उसने पाकिस्तान को बैलिस्टिक मिसाइलों के कलपुर्जे दिए हैं। सर्वविदित है कि पाकिस्तान की पहचान पहले ही आतंकवादी ताकतों को मदद करने वाले देशों मेें है। ऐसे में भारत के लिए यह अधिक चिंता का विषय हो सकता है। अब हाइड्रोजन बम मामले में जहां तक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा हस्तक्षेप या कार्रवाई का सवाल है तो यहां पर ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि जिस देश में पूर्ण रूप से किसी तानाशाह और निरंकुश का शासन हो, इसके साथ ही जहां अतंर्राष्ट्रीय रूप से मान्य किसी भी नियम का उल्लंघन होता रहा हो वहां ऐसी रुकावटों या प्रतिबंध का कोई असर नहीं होता। क्यों कि ऐसे शासन और शासकों को आमजन की मुश्किलों से कोई सरोकार नहीं होता जो कि प्रतिबंध के बाद सामने आ सकती हैं। उन्हें तो केवल अपनी मनमानी और तानाशाह रवैये पर ही फक्र होता है। वहीं उत्तर कोरिया को डर इसलिए भी नहीं है क्यों कि उसकी पीठ पर चीन का हाथ है। हालांकि फिलहाल विश्व के सामने चीन ने उत्तर कोरिया के इस कदम को अदूरदर्शी बताते हुए इसकी निंदा की है। लेकिन यह वही चीन है जो कभी भी अपनी बात से पलट सकता है तो यहां तो बात उसके मित्र देश उत्तर कोरिया की है। खैर जो भी हो लेकिन हाइड्रोजन बम का परीक्षण इसलिए भी अधिक घातक है क्यों कि यह आम परमाणु बम के मुकाबले अधिक शक्तिशाली होता है। यह एक ही विस्फोट में किसी बड़े शहर का अस्तित्व मिटा सकता है। अब पूरे विश्व के लिए ही यह चिंता का विषय है और सब को मिलजुल कर ही इससे निपटना है और इसका सार्थक हल निकालना है। यदि ऐसे प्रयोगों पर रोक नहीं लगाई गई तो यह हमेशा ही विश्व शांति के लिए खतरा बने रहेंगे और सभी को परेशानी में डालते रहेंगे, इसलिए इन पर समय रहते अंकुश लगाना अत्यंत आवश्यक है।

Updated : 2016-01-08T05:30:00+05:30
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