प्रशासन के बुलडोजर पर लगा विराम

न्यायालय ने दिए यथास्थिति बनाए रखने के आदेश, मामला समाधिया कॉलोनी में अतिक्रमण हटाने का

ग्वालियर। उच्च न्यायालय ने प्रशासन के बुलडोजर पर विराम लगाते हुए समाधिया कॉलोनी स्थित उद्यान में बने मंदिर और दरगाह के मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति यू.सी. माहेश्वरी एवं न्यायमूर्ति एस.के. गुप्ता की युगलपीठ ने जिलाधीश ग्वालियर डॉ. संजय गोयल को आदेश दिया है कि वे इस प्रकरण से संबंधित सभी पक्षों को सुनें और तीन माह में इसका निराकरण करें। तब तक इन स्थलों से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाए।
क्या है मामला
समाधिया कॉलोनी स्थित उद्यान में मंदिर व दरगाह बनाए जाने के विरोध में समीर कुमार शर्मा ने जनहित याचिका प्रस्तुत की थी। याचिका में यह आरोप लगाया गया था कि अतिक्रमण करने के उद्देश्य से इस प्रकार का निर्माण किया गया है। याचिका को निराकृत करते हुए न्यायालय ने याची को जिलाधीश के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का आदेश दिया था और जिलाधीश को उनके अभ्यावेदन पर उचित कार्यवाही करने का आदेश दिया था। न्यायालय के आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर की गई, जिस पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने जिला प्रशासन को अनुपालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। इस पर प्रशासन ने कुछ दिन पहले समाधिया कॉलोनी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी। आज हुई सुनवाई में शासन की ओर से पैरवी करते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता अरविन्द दूदावत ने बताया कि न्यायालय के आदेश के पालन में उक्त कार्रवाई की गई । उन्होंने यह भी बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के इस प्रकार के प्रकरण के संबंध में दिए गए आदेश के परिपालन में एक समिति का भी गठन किया गया है।
जिलाधीश व निगमायुक्त को किया तलब
अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान क्षेत्रीय नागरिक बड़ी संख्या में न्यायालय कक्ष में उपस्थित रहे। याचिका में इंटरवीनर की ओर से पैरवी करते हुए अभिभाषक एच.के. शुक्ला ने बताया कि किसी भी क्षेत्रीय नागरिक को मंदिर व दरगाह से परेशानी नहीं है और न ही आवागमन में किसी प्रकार का अवरोध उत्पन्न हो रहा है। प्रशासन ने बिना उनका पक्ष सुने तोडफ़ोड़ की कार्रवाई को अंजाम दिया। इस पर न्यायालय ने जिलाधीश डॉ. संजय गोयल एवं निगमायुक्त अनय द्विवेदी को भोजन अवकाश के बाद व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया। जिलाधीश ने न्यायालय को बताया कि प्रशासन ने सिर्फ टीनशेड हटाए थे। उन्होंने न्यायालय को यह भी बताया कि उक्त जमीन के संबंध में सिविल सूट भी चल रहा है।

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