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सावित्री बाई फुले का जन्मदिवस मनाया

झांसी। भारतीय बौद्ध महासभा की बैठक काशीराम बौद्ध की अध्यक्षता व प्रभूदयाल आदिम के मुख्य आतिथ्य एवं सीताराम कुशवाह के विशिष्ठ आतिथ्य में सम्पन्न हुई। बुद्ध वंदना और पंचशील का पाठ किया गया। इस अवसर पर सीताराम कुशवाहा, प्रभूदयाल आदिम ने संयुक्त रुप से साबित्री बाई फुले के चित्र पर माल्यार्पण करते हुए दीप प्रज्जवलित किया। सीताराम कुशवाहा ने उनके जीवन संघर्ष पर प्रकाश डाला एवं बताया कि उन्होने नारी शिक्षा पर बहुत जोर दिया। महिलाओं के लिए स्कूल खोले। सबसे पहले स्कूल 1848 में पूना में महिलाओं के लिए खोला। प्रभूदयाल आदिम ने बताया कि उस समय ब्रिटिश काल में महाराष्ट्र में पेशवाओं का शासन था जो कि असमानता व छुआछूत के लिए जाने जाते हैं। स्कूल जाते समय साबित्री बाई फुले के कपड़ों पर कीचड़ फेंक कर विरोध करते थे लेकिन उन्होने हार नहीं मानी। अंग्रेजों ने उनका सहयोग किया। हरीदास सुमन ने कहा कि साबित्री बाई फुले के जीवन से हमें प्रेरणा मिलती है कि कठिनाईयां आने पर भी हमें धैर्य नहीं खोना चाहिए।
इस अवसर पर हरीदास सुमन, हरचरनलाल बौद्ध, गंगाराम अहिरवार, काशीराम नन्ना, जगदीश बाबू, आनंद कुमार गौतम, दिनेश विद्रोही, अमित कुमार वर्मा, अवधेश ताई, चन्द्रावती सुमन, भन्ते ज्ञानदीप पारीछा आदि मौजूद रहे। काशीराम बौद्ध ने आभार व्यक्त किया।

Updated : 2016-01-04T05:30:00+05:30
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