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हम चाहते हैं कि जनता को रोज पानी मिले

नगर निगम आयुक्त फिर हुए तलब तिघरा में 31 जुलाई तक का पानी

ग्वालियर। शहरवासियों को प्रतिदिन पानी ना मिलने पर उच्च न्यायालय ने एक बार फिर नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति यूसी माहेश्वरी व न्यायमूर्ति एसके गुप्ता की युगलपीठ ने कहा कि जनता 'कर' देती है, उसे नगर निगम के भ्रष्टाचार- शिष्टाचार से कोई मतलब नहीं है। हम केवल आम आदमी का फायदा चाहते हैं। इसलिए किस विभाग द्वारा क्या किया जा रहा है, इस तकनीकी पहलू से परे हटकर बात कर रहे हैं। हम केवल ये चाहते हैं कि जनता को रोज पानी मिले। इसके साथ ही न्यायालय ने प्रकरण की अगली सुनवाई 28 जनवरी को नियत करते हुए नगर निगम आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया है।
शहर में व्याप्त पानी की समस्या के संबंध में श्रीकृष्ण शर्मा ने जनहित याचिका प्रस्तुत की है। पूर्व में सुनवाई करते हुए न्यायालय ने तत्कालीन निगम आयुक्त अजय गुप्ता से पूछा था कि शहर को नियमित पानी कैसे दिया जा सकता है। इस पर उन्होंने कहा था कि यदि जल संसाधन विभाग तिघरा जलाशय के जल स्तर को बरकरार रखने की हामी भर दे तो ननि को रोज पानी देने में कोई दिक्कत नहीं है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने इस पर हामी भर दी लेकिन इसके बाद नगर निगम परिषद ने एक दिन छोड़कर पानी देने का प्रस्ताव पारित किया था। इसी बात पर न्यायालय ने आपत्ति जताते हुए कहा कि ननि अपनी बात पर अडिग नहीं है। इसी के चलते उन्होंने नगर निगम आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया है। ताकि वे न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर ये बता सकेंगे कि शहर को एकदिन छोड़कर पानी क्यों दिया जा रहा है?

व्यर्थ में बह जाता है 4.50 एमसीएफटी पानी
जल संसंधान विभाग ने न्यायालय में अपना पक्ष रखते हुए बताया कि ननि ने उससे प्रतिदिन 200 एमएलडी पानी की मांग की है।
18 जनवरी 2016 को तिघरा जलाशय का जलस्तर 730.35 फीट है और बांध की जीवित क्षमता 2295.326 एमसीएफटी है।
तिघरा से प्रतिदिन 7.06 एमसीएफटी पानी प्रदाय किया जा रहा है जबकि बांध व लाइन लॉसेस में प्रतिदिन 4.50 एमसीएफटी पानी बह जाता है।
इस गणना के आधार पर शहर को प्रतिदिन 11.56 एमसीएफटी पानी प्रदाय किया जाता है। ऐसे में तिघरा में 31 जुलाई 2016 तक का पानी है।

Updated : 2016-01-20T05:30:00+05:30
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