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सार्थकता पर ध्यान केन्द्रित करें कार्यकर्ता: पवैया

प्रशिक्षण महाअभियान में प्रशिक्षणार्थियों को बताई भाजपा की वंश परम्परा

शिवपुरी। भाजपा कार्यकर्ता को जीवन में सफलता से अधिक सार्थकता पर ध्यान देना चाहिए। सफलता तो चोरी करने से भी मिल जाती है लेकिन सार्थकता महत्वपूर्ण है। राजनैतिक कार्य करते समय सार्थकता को लक्ष्य बनाना चाहिए। यह बात भाजपा विधायक जयभान सिंह पवैया ने भाजपा प्रशिक्षण महा अभियान के अंतर्गत आयोजित संभागीय कार्यशाला के दूसरे दिन के प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए कही।
श्री पवैया ने प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि हम राजनैतिक दल के कार्यकर्ता हैं और कार्यकर्ता होने के नाते हमें अपनी वंश परंपरा से भी अवगत होना आवश्यक है। भाजपा का इतिहास बताता है कि पार्टी का कार्यकर्ता कभी अन्याय के आगे नहीं झुकता तथा साहस के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता जाता है। भाजपा कार्यकर्ता को तनावग्रस्त तथा अहंकारी नहीं होना चाहिए और हमेशा नैतिक मार्ग पर चलना चाहिए। श्री पवैया ने बताया कि आजादी के आंदोलन में कांग्रेस ने सिर्फ अपने आपको स्थापित किया है जबकि इस आंदोलन में भाजपा से जुड़े राष्ट्रवादी नेता भी शामिल रहे। कांग्रेस पर तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए श्री पवैया ने बताया कि इसी कारण कांग्रेस ने राष्ट्रध्वज के समान अपना तिरंगा झंडा चिन्हित किया। भाजपा ने देशहित को हमेशा राजनीति से ऊपर रखा है इसी कारण 1971 के पाकिस्तानी युद्ध में अटल जी ने पूर्व प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी को दुर्गा का अवतार बताने में भी संकोच नहीं किया।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए श्री पवैया ने कहा कि कांग्रेस ने कभी भी चुनाव मुद्दों पर नहीं लड़ा बल्कि भावनात्मक मुद्दों के आधार पर कांग्रेस ने चुनाव लड़कर विजय प्राप्त की है। भाजपा कार्यकर्ताओं को समझाइश देते हुए श्री पवैया ने कहा कि उन्हें पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा असंदिग्ध रखनी चाहिए। कुछ कार्यकर्ता पार्टी से टिकट न मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ जाते हैं जो कि उचित नहीं है। प्रारंभ में भाजपा जिलाध्यक्ष सुशील रघुवंशी ने मुख्य वक्ता श्री पवैया और सत्र की अध्यक्षता कर रहे रणवीर सिंह रावत का माल्यार्पण से स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन अवधेश नायक ने किया।
मोदी की लोकप्रियता के आगे ओबामा फीके
मुख्य वक्ता पवैया ने अपने उद्बोधन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कर खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि श्री मोदी की देश में ही नहीं अमेरिका में इतनी लोकप्रियता बढ़ गई कि वहां के राष्ट्रपति बराक ओबामा की छबि उनके आगे फीकी पड़ गई। जबकि भारत में मीडिया का एक वर्ग एजेंडा बनाकर उनका विरोध कर रहा है जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है।
जनसंघ से शुरू हुई थी भाजपा की विकास यात्रा
जयभान सिंह पवैया ने भाजपा की वंश परंपरा का इतिहास उल्लेखित करते हुए कहा कि गुुरु गोलवलकर व श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने मिलकर 1951 में जनसंघ नाम से नया दल बनाया। केसरिया रंग का झंडा और जलता हुआ दीपक चुनाव-चिन्ह जनसंघ की पहचान थी। जनसंघ सहित राष्ट्रवादी 38 सांसदों का फ्रंट संसद में बना लेकिन नेहरू सरकार ने इस फ्रंट को विपक्षी दल का दर्जा नहीं दिया लेकिन जनता से इसे अलिखित रूप में मान्यता मिली। वर्ष 68 में जनसंघ को चुनाव में बहुत बड़ा समर्थन मिला और मप्र, राजस्थान, बिहार आदि राज्यों में सरकारें बनीं। 1971 में इन्दिरा लहर के कारण जनसंघ को पराजय का सामना करना पड़ा। सन 77 में जनसंघ सहित कई दलों का विलय हुआ और जनता पार्टी सत्ता में आई, लेकिन डेढ़ वर्ष बाद ही इस दल में फूट पड़ गई और भारतीय जनता पार्टी के रूप में जनसंघ के नेताओं ने नया दल बनाया।
सन १९84 में भाजपा सिर्फ दो सीटों पर सिमट गई लेकिन 1993 में 13 दिन, 96 में 13 माह और 1998 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की केन्द्र में सरकार बनी। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को ऐतिहासिक सफलता हासिल हुई और नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बने।

Updated : 2015-08-10T05:30:00+05:30
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