Top
Home > Archived > हे ईश्वर अरबों के मालिक पर हाल हैं बेहाल

हे ईश्वर अरबों के मालिक पर हाल हैं बेहाल

हे ईश्वर अरबों के मालिक पर हाल हैं बेहाल
X

*प्रदेश भर के 50 हजार मंदिर जीर्ण-शीर्ण

*अरबों की जमीन पर हैं भू-माफियाओं के कब्जे

अतुल तारे/ग्वालियर/भोपाल। हम सबकी मान्यता है। दृढ़ विश्वास है कि सारे संसार का स्वामी ईश्वर है। यह हम सबकी आस्था का विषय भी है पर यह भी एक सच है कि मध्यप्रदेश में सबसे बड़ा भू-स्वामी (राजस्व एवं वन विभाग को छोड़ कर) भी ईश्वर स्वयं है। यह हम नहीं कह रहे हैं। सरकारी रिकार्ड बता रहे हैं। सरकारी दस्तावेज कहते हैं कि आठ लाख बीघा से भी अधिक जमीन का स्वामी ईश्वर है। करोड़ों की राशि बैंक में है। लाखों का ब्याज आता है। पर बावजूद इसके अयोध्या की तरह यहां भी रामलला टाट में है। मंदिरों की हालत जीर्णशीर्ण है, बेहाल है।
इन मंदिरों पर भू-माफियाओं के कब्जे हो रहे हैं। प्रदेश सरकार की निगाह में ऐसा नहीं है कि ये सारे तथ्य नहीं हैं पर इच्छा शक्ति के अभाव के चलते और प्राथमिकता के क्रम में यह विषय अभी न होने से मध्यप्रदेश देवस्थान प्रबंधन विधेयक वल्लभ भवन में धूल खा रहा है। इस बीच मंदिरों की देखभाल एवं बेहतर प्रबंधन के लिए गठित म.प्र. ओकाफ बोर्ड का कार्यकाल भी बीती 15 जुलाई को समाप्त हो गया है।उम्मीद की जानी चाहिए कि मध्यप्रदेश शासन का धर्मस्व विभाग इस गंभीर विषय को संज्ञान में लेकर मंदिरों का न केवल बेहतर प्रबंधन कराने बल्कि उन्हें जन जागरण का शक्ति केन्द्र बनाने के लिए आवश्यक कदम शीघ्र उठाएगा।
उल्लेखनीय है कि मात्र ग्वालियर रियासत की ही 12 जिलों की 40 तहसीलों में कुल 50856 मंदिरों की देखभाल का जिम्मा प्रदेश शासन के ओकाफ बोर्ड आफ ट्रस्टीज को है। ओकाफ बोर्ड का कार्य क्षेत्र सम्पूर्ण पुरानी ग्वालियर रियासत है। जिसमें प्रमुख रूप से ग्वालियर एवं उज्जैन प्रमुख है। बोर्ड का अध्यक्ष पदेन आयुक्त ग्वालियर संभाग है। आयुक्त चंबल एवं आयुक्त उज्जैन इसके पदेन सदस्य है। प्रदेश शासन ने आयुक्त के साथ तीन अशासकीय सदस्य भी नियुक्त किए। इनमें उज्जैन से तारा सिंह, ग्वालियर से चन्द्रशेखर दीक्षित एवं गुना से अलंकार वशिष्ठ। इस बोर्ड का कार्यकाल हाल ही में समाप्त हुआ। बोर्ड के सदस्य तारा सिंह ने स्वदेश को बताया कि मंदिरों के पास लगभग आठ लाख बीघा से अधिक मूल्यवान जमीन सरकारी दस्तावेजों में दर्ज है। यही नहीं मध्यप्रदेश से बाहर भी खासकर उत्तरप्रदेश स्थित मथुरा में भी करोड़ों की जमीन है, मंदिर है जिन पर अधिकांश में बेजा कब्जे है। अभी यह भी अनुमान है कि कई जमीनों का तो बोर्ड को भी अतापता नहीं है। श्री सिंह के अनुसार बैंक खातों में करोड़ों की राशि जमा है। कई मंदिर तो बीच शहर में होने के कारण मंदिरों की जमीन की कीमत करोड़ों करोड़ में है। पर आज इन मंदिरों पर बेजा कब्जे हो रहे हैं। भू-माफिया सक्रिय हैं, पर बोर्ड के पास कोई खास कानूनी अधिकार न होने से एवं अध्यक्ष ओकाफ बोर्ड जो कि आयुक्त ग्वालियर संभाग हैं के पास कई प्रशासनिक अन्य व्यस्तताओं के चलते इस पर गौर करने का समय न होने से गंभीरतम मामलों में से मात्र 10 फीसदी मामले ही भिन्न-भिन्न न्यायालयों में लावारिस हालत में लड़े जा रहे हैं और बोर्ड अधिकांश में हार का सामना कर रहा है। श्री तारा सिंह ने बताया कि अधिकांश मंदिरों के पुजारी एवं भू-माफिया तत्कालीन प्रशासक से सांठगांठ कर खसरा खतौनी में हेरफेर कर मंदिरों की जमीन में हेरफेर कर रहे हैं।
लिखने की आवश्यकता नहीं कि यह विषय निश्चित रूप से गंभीर एवं संवेदनशील है। खासकर मध्यप्रदेश में आज भाजपा की सरकार है और इस नाते वह हिन्दू आस्था केन्द्रों पर और अधिक संवेदनशीलता के साथ कदम उठाएगी। यह अपेक्षा की जा सकती है।प्रदेश में बोर्ड के अधीन स्थित मंंदिरों की जीर्णशीर्ण स्थिति का विषय संज्ञान में है। शासन स्तर पर विचार विमर्श जारी है। शीघ्र ही सरकार समुचित कदम उठाएगी।

आपका कहना है

प्रदेश में बोर्ड के अधीन स्थित मंंदिरों की जीर्णशीर्ण स्थिति का विषय संज्ञान में है। शासन स्तर पर विचार विमर्श जारी है। शीघ्र ही सरकार समुचित कदम उठाएगी।
यशोधरा राजे सिंधिया,
मंत्री धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व


ओकाफ बोर्ड के पुनर्गठन एवं मध्यप्रदेश देवस्थान प्रबंधन विधेयक का प्रारुप लगभग तैयार है। शासन स्तर पर संवाद जारी है।
मनोज श्रीवास्तव
प्रमुख सचिव धर्मस्व

यह सही है मंदिरों की जमीन पर बेजा कब्जे हैं। प्रशासन नियमों के अधीन कार्रवाई करता है। ओकाफ बोर्ड के पुनर्गठन एवं नए विधेयक का विषय शासन के पास विचाराधीन है।
के.के. खरे, आयुक्त ग्वालियर संभाग
अध्यक्ष ओकाफ बोर्ड

Updated : 2015-07-30T05:30:00+05:30
Next Story
Share it
Top