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सामाजिक आ​र्थिक जनगणना के आंकड़े पेश, जेटली ने बताया अहम दस्तावेज

सामाजिक आ​र्थिक जनगणना के आंकड़े पेश, जेटली ने बताया अहम दस्तावेज

नई दिल्ली। मोदी सरकार अपने राज में हमेशा कुछ अलग करके नया उदाहरण पेश कर रही है, इसी का एक ताजा उदाहरण आज 1932 के बाद पहली बार समाजिक-आर्थिक जनगणना के आंकड़े को पेश ​करके दिखाया।
आज नई दिल्ली में वित्त मंत्री अरूण जेटली ने सामाजिक-आर्थिक जनगणना के आंकड़े पेश किए। इस मौके पर श्री जेटली ने कहा कि यह अहम दस्तावेज है, इससे भारत की हकीकत पता चलेगी।
उन्होंने कहा सामाजिक, आर्थिक और जाति आधारित जनगणना के आंकड़ों से सरकार को योजनाएं बनाने में काफी मदद मिलेगी। सरकार का कहना है कि इस तरह की जनगणना से यह पता चल सकेगा कि समाज में किस तबके की भागीदारी कितनी है और उसे किस तरह की योजनाओं की जरूरत है। गरीबी रेखा से नीचे रह रही आबाद की हालत सुधारने में भी मदद मिलेगी।
पहली बार जारी समाजिक आर्थिक जनगणना में यह बात सामने आई है कि दस प्रतिशत वेतनभोगी ग्रामीण परिवारों की संख्या होने के बावजूद केवल 4.6 प्रतिशत ग्रामीण परिवार आयकर देते हैं। सामाजिक आर्थिक एवं जाति जनगणना 2011 में कहा गया कि आयकर देने वाले अनुसूचित जाति के परिवारों की संख्या 3.49 प्रतिशत है जबकि अनुसूचित जनजाति के ऐसे परिवारों की संख्या मात्र 3.34 प्रतिशत है

Updated : 2015-07-03T05:30:00+05:30
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