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हत्या के जुर्म में दो भाईयों को आजीवन कारावास

झाँसी। सत्र न्यायाधीश विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र अधि.)विनोद कुमार सिंह के न्यायालय से हत्या के दो आरोपियों पर आरोप सिद्व होने पर आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। घटनाक्रम बताया गया कि थाना शाहजहांपुर के चन्दार गांव के वादी ज्ञान सिंह पुत्र रघुवीर सिंह ने शाहजहांपुर थाने मेें रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 23 मार्च 2012 को वह अपने खेत से चना काटकर घर वापस आया तथा समय करीब रात 8.30 बजे अपने दरवाजे पर बैठकर मजदूरों से पिसी कतरबाने की चर्चा कर रहा था। इतने में चन्दार गांव के ही संतोष कुमार पुत्र गंगा प्रसाद व उसके बड़े भाई उमाशंकर पुत्र गंगा प्रसाद मेरे दरवाजे पर आए व पुरानी रंजिश को लेकर गाली गलौज करने लगे। मैने व मेरे भाई दौलत सिंह ने गाली देने से मना किया तो उन लोगों ने मेरे भाई रामनारायण को तमाचा मार दिया। जब हम लोगों ने इसका विरोध किया तो संतोष कुमार अपनी इकनाली लाइसेंसी बन्दूक लेकर घर से आया व संतोष भाई उमाशंकर ने ललकारते हुये कहा कि गोली मारो। इतने में संतोष कुमार ने अपनी लाइसेंसी बन्दूक से हम लोगों को जान से मारने की नियत से फायर किया, जिसका छर्रा मेरे चचेरे भाई चन्द्रभान पुत्र ओम प्रकाश की दाहिनी जांघ के ऊपर लगा और दूसरा फायर पुन: जान से मारने की नियत से किया जो मेरे भाई दौलत सिंह के दाहिनी ओर छाती में लगा। यह गोली सीने से आर पार निकल गई व दौलत सिंह मौके पर ही लहूलुहान होकर गिर पड़ा। आवाज सुनकर गांव के अन्य लोग आ गए तो संतोष व उमाशंकर जान से मारने की धमकी देकर भाग गए।
इसके बाद ज्ञान सिंह अपने भाई दौलत सिंह को 23 मार्च को ही रात 11.30 बजे मेडीकल कालेज लाए जहां 27 मार्च को उसकी मौत हो गई। शाहजहांपुर थाना पुलिस ने यह मामला आरोपी संतोष कुमार व उमाशंकर के खिलाफ धारा 302/34, 307/34 323, 504, 506 के तहत दर्ज कर लिया।
विशेष न्यायाधीश (द.प्र.क्षे.अधि.) विनोद कुमार सिंह ने दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुना। इसके बाद आज इस मामले में निर्णय सुनाया जिसमें संतोष व उमाशंकर को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उन्होने अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग सजा व अर्थदण्ड से दण्डित किया। दोनों हत्यारोपियों को धारा 302/34 में आजीवन कारावास व 10 हजार रुपये जुर्माना, धारा 307 में सात साल की सजा व 5 हजार रुपये अर्थदण्ड, 323 में छह माह की सजा, धारा 504 में एक साल की सजा व एक हजार रुपये जुर्माना, धारा 506 में दो साल की व दो हजार रुपये अर्थदंड से दडिंत किया। इस मुकदमे की अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी प्रकाश सिंह यादव एड. ने की। +

Updated : 2015-07-17T05:30:00+05:30
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