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बीएड महाविद्यालयों को फिर मिली सम्बद्धता

स्थाई परिषद के निर्णय पर ईसी ने लगाई मुहर चार मई को स्थाई समिति ने छीनी थी सम्बद्धता

ग्वालियर, विशेष संवाददाता। जीवाजी विश्वविद्यालय कार्यपरिषद ने सत्र 2015 के लिए सम्बद्धता से वंचित किए गए बीएड व बीपीएड के सभी 23 महाविद्यालयों को सम्बद्धता पुन: प्रदान कर दी है। इसके लिए विश्वविद्यालय ने रविवार को अवकाश होने के बाद भी आपात रूप से स्थाई समिति और कार्यपरिषद की बैठक बुलाई थी। विश्वविद्यालय ने महाविद्यालयों को सम्बद्धता प्रदान करने के लिए यह सब क्यों किया? इसे लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कार्यपरिषद की बैठक में सम्बद्धता के मुद्दे पर चर्चा के दौरान सभी सदस्यों ने सर्वानुमति से स्थाई समिति द्वारा लिए गए निर्णय को हरी झंडी दे दी। कार्यपरिषद में सभी 23 महाविद्यालयों से अपेक्षा की गई है कि वे अपने यहां प्राचार्य और शिक्षकों से संबंधित जो भी खामियां हैं, उन्हें 15 दिवस में दूर किया जाए। बैठक में सदस्यों को यह भी बताया गया कि इन सभी 23 महाविद्यालयों से स्पष्टीकरण चाहे गए थे। इसके लिए सभी को 10 मई तक का समय दिया गया था। निर्धारित समयावधि में चंूकि सभी महाविद्यालयों से स्पष्टीकरण प्राप्त हो गए हैं। इस आधार पर उन्हें सम्बद्धता प्राप्त करने का एक और मौका प्रदान किया जाता है। उल्लेखनीय है कि बैठक में हालांकि किसी कार्यपरिषद सदस्य ने 23 महाविद्यालयों को पुन: सम्बद्धता दिए जाने के मामले में खुलकर कुछ नहीं बोला है, लेकिन खुसुर-पुसुर जरूर होती रही। एक सदस्य का कहना था कि जब इन्हें सम्बद्धता देना ही थी तो यह तमाशा क्यों किया? इसे लेकर न सिर्फ शिक्षकों बल्कि छात्रों के बीच भी सवाल खड़े हो रहे हैं। बैठक में कुलपति संगीता शुक्ला एवं कुलसचिव आनंद मिश्रा के अलावा कार्यपरिषद के अधिकांश सदस्य मौजूद थे।
स्पष्टीकरण पर होगा निरीक्षण
बैठक में यह भी कहा गया कि इन महाविद्यालयों ने अपने कथन के मुताबिक आवश्यक सभी बिन्दुओं की प्रतिपूर्ति कर ली है। इसका समिति द्वारा निरीक्षण किया जाएगा। अगर निरीक्षण के दौरान कोई खामी मिलती है तो जरूर संबंधित महाविद्यालय के खिलाफ कार्रवाई हो सकेगी। बैठक में यह भी तय किया गया कि कार्यपरिषद के इस निर्णय के बारे में राज्य शासन को भी अवगत कराया जाएगा।
सुबह हुई थी स्थाई
समिति की बैठक
रविवार को सबसे पहले स्थाई समिति की बैठक बुलाई जाती है। बैठक में तय कराया जाता है कि सम्बद्धता से वंचित किए गए महाविद्यालय आगामी 15 दिवस में अपनी सभी खामियों को दूर कर लेंगे। इस आश्वासन के आधार पर उन्हें क्यों न सम्बद्धता प्रदान कर दी जाए। यह तय किया गया और निर्णय को कार्यपरिषद के लिए आगे बढ़ा दिया। उल्लेखनीय है कि चार मई को स्थाई समिति ने पहले इन्हीं महाविद्यालयों की सम्बद्धता छीन ली थी।
अब ऑनलाइन होगी सम्बद्धता
विश्वविद्यालय ने सम्बद्धता को पारदर्शी और वस्तुनिष्ठ बनाने के लिए इसे ऑनलाइन करने का निर्णय लिया है। आगामी दिनों में जब भी किसी महाविद्यालय को सम्बद्धता प्रदान करना होगी तो महाविद्यालय को ऑनलाइन आवेदन करना होंगे। इसका लाभ यह होगा कि कोई भी महाविद्यालय अपना आवेदन करने के बाद दस्तावेजों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं कर पाएगा। उल्लेखनीय है कि स्थाई समिति की बैठक में इस आशय का प्रस्ताव संकायाध्यक्ष प्राध्यापक एस.के. सिंह द्वारा रखा गया था। पहले तो स्थाई समिति के सदस्यों ने इसे लेकर नाक सिकोड़ी, लेकिन बाद में सभी ने हामी भर दी। बाद में स्थाई समिति से यही प्रस्ताव कार्यपरिषद में पहुंचा, जहां उसे हरी झंडी दे दी गई।

Updated : 2015-05-11T05:30:00+05:30
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