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इस साल भी सामान्य से कम रह सकता है मानसून

इस साल भी सामान्य से कम रह सकता है मानसून
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नयी दिल्ली: भारतीय मौसम विभाग :आईएमडी: का अनुमान है कि पिछले साल की तरह इस बार भी मानसून के सामान्य से कम रहने की संभावना है और विभाग ने इसके लिए अल नीनो कारक को आंशिक रूप से जिम्मेदार ठहराया है। विभाग ने कहा कि कम वष्रा से पश्चिमोत्तर और मध्य भारत के हिस्सों पर सबसे अधिक असर पड़ने की संभावना है। केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री हषर्वर्धन ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मानसून दीर्घकालिक औसत का 93 फीसदी रहेगा जो सामान्य से कम है।
भारतीय मौसम विभाग ने 2014 में पहले अनुमान में मॉनसून के समान्य से 95 फीसदी कम बारिश होने का अनुमान लगाया था लेकिन वास्तविक बारिश 88 फीसदी के करीब रही। मौसम विभाग लंबी अवधि के औसत के आधार 96 फीसदी से 104 फीसदी के दायरे को सामान्य, 105 से 110 फीसदी एलपीए को सामान्य से ज्यादा और 110 फीसदी को अत्याधिक बारिश मानता है। चार महीने के मानसून सीजन (जून-सितंबर) में पूरे साल के दौरान होने वाली बारिश में इसकी तीन चौथाई हिस्सेदारी होती है।
वर्ल्ड मेट्रोलोजिकल ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, दक्षिण एशिया के ज्यादातर जगहों पर मानसून में सामान्य कम बारिश होने की संभावना है। ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक मध्य और पश्चिमोत्तर भारत के अधिकांश भागों में 25-40 फीसदी कम बारिश होने की आशंका है। वहीं, दक्षिणी प्रायद्वीप, उत्तरी भारत और दक्षिणी भारत के कुछ हिस्सों के कुछ हिस्सों में सामान्य मानसून की संभावना जताया है।
अमेरिका के जलवायु पूर्वानुमान केंद्र (सीपीसी) और ऑस्ट्रेलियाई के मौसम विज्ञान ब्यूरो ने इस गर्मी में अल नीनो की भविष्यवाणी की है। सीपीसी इस साल 50-60 फीसदी अल नीनो की संभावना जताई है। एजेंसी ने पहले ही घोषणा कर चुकी है कि प्रशांत महासागर में कमजोर अल नीनो की स्थिति पनप रही है। वहीं ऑस्ट्रेलियाई एजेंसी ने 70 फीसदी अल नीनो की संभावना जताई है। अंतरराष्ट्रीय जलवायु मॉडल भविष्यवाणी कर रहे है कि अल नीनो साल के मध्य में पहुंच सकता है।

Updated : 2015-04-22T05:30:00+05:30
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