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हमारे प्रति इतना अविश्वास क्यों

आदेश का पालन कराने की जवाबदेही नोडल अधिकारी पर

ग्वालियर। राज्य सरकार की नीति पर निजी स्कूलों के संचालकों व प्राचार्यो ने आपत्ति जताते हुए जिलाधीश से इसमें परिवर्तन कराने की मांग की। संचालकों व प्राचार्यों ने कहा कि सरकार बोर्ड परीक्षा केवल शासकीय विद्यालयों में आयोजित कराती है वहीं कॉपियां जांचने के लिए भी केवल शासकीय शिक्षकों को अवसर दिया जाता है। ऐसा क्या कारण है जिसके चलते सरकार का निजी विद्यालयों के प्रति इतना अविश्वास हैं?
नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत डॉ. भगवत सहाय सभागार में आयोजित हुई कार्यशाला में प्राइवेट स्कूलों के प्राचार्यों व संचालकों ने जिलाधीश पी नरहरि से अपनी पीड़ा व्यक्त की वहीं कुछ बिन्दुओं पर जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली की प्रशंसा भी की। कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिलाधीश ने कहा कि सभी प्राइवेट स्कूल इस बात को भलीभाँति समझें कि उनका काम सामाजिक सेवा का है। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी इलैया राजा टी, जिला शिक्षा अधिकारी मोहर सिंह सिकरवार, अनुविभागीय राजस्व अधिकारी महिप तेजस्वी, जिला शिक्षा केन्द्र के परियोजना समन्वयक संजीव शर्मा मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
इन बातों में की प्रशंसा

स्कूल संचालकों व प्राचार्यों ने जिलाधीश के रैम्प बनाने के निर्णय को सराहते हुए कहा कि बाधारहित वातावरण बनाने से कई छात्र-छात्राएं लाभांवित हो रहे है। साथ ही यह भी कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून का जितना प्रभावी क्रियान्वयन ग्वालियर में हो रहा है उतना प्रदेश के अन्य किसी भी जिले में नहीं हों रहा।
नोडल अधिकारी को मिली जिम्मेदारी
जिलाधीश ने आदेश के शत प्रतिशत क्रियान्वयन के लिए नई व्यवस्था बनाई है जिसमें चार से पांच विद्यालयों का एक क्लस्टर बनाया जाएगा। इस क्लस्टर की जिम्मेदारी नोडल अधिकारी को दी जाएगी। जो ये सुनिश्चित करेगा कि जिलाधीश के आदेश व शिक्षा के अधिकार अधिनियम का शत प्रतिशत पालन हो रहा है अथवा नहीं?


इन बातों पर दिया जोर


* शिक्षा का अधिकार अधिनियम का शत प्रतिशत पालन हो साथ ही जिलाधीश कार्यालय ने विद्यालय प्रबंधन को जिन बातों का पालन करने का आदेश दिया है उसका भी कड़ाई से पालन हो।
ये आदेश दिए हंै जिलाधीश ने

* फीस नहीं देने पर छात्रों को मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताडि़त नहीं किया जाए। और न ही सत्र से निकाला जाए । साथ ही उन्हें परीक्षा देने से भी वंचित नहीं रखा जाए। इस संबंध में अभिभावकों से बात की जाए।
* गणवेश व पुस्तकों के विक्रय के लिए दुकानों की सूची चस्पा की जाए। प्रत्येक विद्यालय में छात्राओं के लिए पृथक से शौचालय, नि:शक्त बच्चों के लिए बाधारहित वातावरण बनाया जाए।
* इस बात का ध्यान रखा जाए कि विद्यालय को जिस बोर्ड से मान्यता प्राप्त है, अभिभावकों को उसी की जानकारी दी जाए।
* सभी विद्यालयों में सीसीटीवी कैमरे व अग्निशमन यंत्र लगवाए जाएं। साथ ही विद्यालय परिसर में जंक फूड व कोल्ड ड्रिंक का विक्रय न करें।
* शुल्क में वृद्धि से पहले अभिभावकों के साथ बैठक करें और फीस वृद्धि के न्यायोचित कारण बताएं।
* स्कूली बच्चों के जाति प्रमाण-पत्र बनाने में शिक्षण संस्थायें इसमें सहयोग करें। साथ ही सभी बच्चों के आधार कार्ड भी बनवाएं। 

Updated : 2015-04-02T05:30:00+05:30
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