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सिंहस्थ के लिए तीन दिन होगा मंथन : शिवराज

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैाहान ने कहा है कि अगले साल अप्रैल में होने वाले सिंहस्थ के लिए देश दुनिया के विद्वानों को बुलाकर अलग-अलग मुद्दों पर मंथन कराया जाएगा। इसी कड़ी में पहला कार्यक्रम इसी माह 17 अप्रैल से शुरू होगा जिसमें मूल्य आधारित जीवन विषय पर मंथन किया जाएगा।
इसका शुभारंभ सद्गुरु जग्गी वासुदेव महाराज अध्यक्ष ईशा फाउंडेशन कोयम्बटूर करेंगे। समापन 19 अप्रैल को अखिल विश्व गायत्री परिवार को निदेशक डॉ. प्रणव पंड्या करेंगे। मुख्यमंत्री निवास में पत्रकारों से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मूल्य आधारित जीवन विषय पर हो रहे मंथन में शिक्षा, व्यवसाय, परिवार, समाज, स्वास्थ्य, पत्रकारिता, प्रशासन, न्याय, सार्वजनिक जीवन में मूल्यों की उपस्थिति और उनकी आधारभूत समग्र और सार्वभौम संकल्पना विषय पर देश दुनिया के विद्वान विचार रखेंगे।
इसके अलावा सिंहस्थ के दौरान सभी धर्मों के मूल में एकता, और विज्ञान व अध्यात्म विषय पर मंथन का कार्यक्रम सिंहस्थ के दौरान और उसके पहले उज्जैन में होगा। एक अन्य मंथन कार्यक्रम भोपाल में होगा जिसका विषय पर्यावरण रखा गया है। सिंहस्थ में पांच करोड़ लोगों के आने के अनुमान, इसलिए अधोसंरचना के काम दिसम्बर 15 तक पूरे कराएंगे। अधोसंरचना के लिए 2750 करोड़ रुपए स्वीकृत जिसमें से 1028 करोड़ रुपए का काम हो चुका है। सुरक्षा पर 300 करोड़ रुपए खर्च होंगे। सिंहस्थ पर कुल 3000 करोड़ से ज्यादा खर्च का अनुमान है, इसके लिए केन्द्र सरकार से भी राशि मांगी है। सिंहस्थ के दौरान प्रबंधन के लिए एक साफ्टवेयर तैयार कराया जा रहा है। यह प्रबंधन में सहयोगी बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे चाहते हैं कि सरकार के प्रयासों में देश व दुनिया में चल रही गतिविधियों और भविष्य की संभावनाओं को लेकर कोई बड़ा निष्कर्ष निकले। इसलिए सिंहस्थ के दौरान ऐसे कार्यक्रम करके दुनिया भर के लोगों को बुलाया जा रहा है। इसके लिए सौ से अधिक नामी हस्तियों की सहमति भी मिल चुकी है।


सिंहस्थ में 3000 करोड़ होंगे खर्च
मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ में करीब 3000 करोड़ रुपए खर्च आएगा। यह राशि राज्य सरकार वहन करेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से फिलहाल कोई सहायता नहीं मिली है, लेकिन इस संबंध में केंद्र से बात की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ में देश-विदेश से करीब 5 करोड़ लोग शामिल होंगे। इसको लेकर सरकार ने व्यापक स्तर पर तैयारियां की हैं, साथ ही पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था पर 300 करोड़ रुपए खर्च किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ को लेकर स्थायी प्रकृति के सभी कार्य दिसंबर 2015 तक पूरे कर लिए जाएंगे, जबकि अस्थायी प्रकृति के सभी कार्य मार्च 2016 तक पूरे हो जाएंगे।

सिंहस्थ महाकुंभ में आने वाले तीर्थयात्रियों के स्नान की व्यवस्था के लिए शिप्रा नदी के दोनों ओर तीन किमी तक घाट बनाए गए हैं, जिस पर 84 करोड़ रुपए व्यय किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सिंहस्थ से जुड़े सभी कार्य दो वर्ष पूर्व प्रारंभ कर दिए गए थे। इन कार्यों में 2750 करोड़ की लागत के 305 कार्य स्वीकृत किए गए हैं। विभिन्न विभागों द्वारा स्वीकृत कार्यों का क्रियान्वयन किया जा रहा है, जिस पर 1028 करोड़ का व्यय अभी तक किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उज्जैन के अलावा आसपास स्थित अन्य तीर्थस्थल जैसे ओंकारेश्वर, महेश्वर, मंदसौर तथा अन्य के लिए 125 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं।

मुख्य बिंदु
-एनवीडीए द्वारा नर्मदा शिप्रा लिंक परियोजना पर 432 करोड़ का व्यय
-ऊर्जा विभाग द्वारा बिजली आपूर्ति व्यवस्था में 80 करोड़ खर्च
-पेयजल एवं सीवरेज प्रबंधन के लिए नगर निगम एवं पीएचई द्वारा 300 करोड़ का व्यय
-रेलवे द्वारा प्रस्तावित कार्यों के लिए 30 करोड़ की स्वीकृति
-संस्कृति एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा विभिन्न कार्यों के लिए 150 करोड़ का व्यय

Updated : 2015-04-16T05:30:00+05:30
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