Home > Archived > पीजी की एक सीट रिक्त रखें: उच्च न्यायालय

पीजी की एक सीट रिक्त रखें: उच्च न्यायालय

ग्वालियर। उच्च न्यायालय ने शासन को आदेश दिया है कि वह पीजी काउंसलिंग के दौरान एमडी मेडिसिन की एक सीट रिक्त रखे। वहीं शासन से पूछा कि क्यों ना याचिकाकर्ता डा. जितेन्द्र कंजौलिया को पीजी पाठ्यक्रम में प्रवेश दे दिया जाए। याची की ओर से पैरवी करते हुए अभिभाषक राजेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि प्री-पीजी परीक्षा में मेरिट लिस्ट में आने के बाद भी याची को नए नियमों के चलते प्रवेश नहीं दिया जा रहा। उन्होंने बताया कि उज्जैन के कालेज में काउंसलिंग के दौरान याची को यह कहते हुए भाग नहीं लेने दिया गया कि वह प्रदेश सरकार के नियमों के अन्तर्गत नहीं आते। प्रदेश सरकार के इन्हीं नियमों को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई है। उन्होंने तर्क दिया कि याची को अच्छे अंकों के आधार पर देश के किसी भी महाविद्यालय में प्रवेश मिल सकता है लेकिन मां के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए वे ग्वालियर के महाविद्यालय से ही पीजी करना चाहते है।

ये है प्रदेश सरकार का नियम
याची के अभिभाषक ने बताया कि प्रदेश सरकार के नियम के अनुसार यदि किसी छात्र ने पीजी पाठ्यक्रम बीच में ही छोड़ दिया तो उसे अगले तीन साल तक पीजी में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही उस छात्र को शासन को पांच लाख रुपए भी देना पड़ेगें।और तो और तीन साल तक उसके मूल दस्तावेज भी महाविद्यालय में ही जमा रहेंगे। उन्होंने बताया कि याची ने पूर्व में मां के स्वास्थ्य के चलते ही पीजी की पढ़ाई छोड़ दी थी। 

Updated : 2015-04-16T05:30:00+05:30
Next Story
Share it
Top