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होर्डिंग्स किसकी जिम्मेदारी, नहीं पता

निगम अधिकारियों के बीच झूल रहे हैं होर्डिंग्स > वैध-अवैध कितने, नहीं है कोई गिनती


ग्वालियर, विशेष संवाददाता। शहर में खरपतवार की तरह उगे हुए होर्डिंग्स नगर निगम अधिकारियों के बीच झूल रहे हैं। वैध और अवैध होर्डिंग्स की संख्या क्या है, यह बताने के लिए भी कोई अधिकारी तैयार नहीं है। यहां तक कि सोमवार तक होर्डिंग्स प्रभारी रहे उपायुक्त एनके गुप्ता ने भी संख्या को लेकर पल्ला झाड़ लिया। निगम अधिकारियों को जब संख्या का ही पता नहीं है तो यह मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर द्वारा सभी अवैध होर्डिंग्स हटाने का आदेश ग्वालियर में कैसे अमल में आएगा। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में गत दिवस एक जनहित याचिका की सुनवाई पर ग्वालियर, इंदौर, भोपाल और जबलपुर नगर निगम को आदेशित किया है कि वे अपने-अपने यहां सभी अवैध होर्डिंग्स को हटाएं। निगम ने अगर गलत तरीके से अनुमतियां देकर होर्डिंग्स को वैध करार दे रखा है तो उन्हें भी अवैध माना है। उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ तो अवैध होर्डिंग्स को हटाने के लिए पहले ही आदेश कर चुकी है। इस आदेश के तारतम्य में निगम की ओर से करीब डेढ़ सैकड़ा अवैध होर्डिंग्स हटाने का दावा भी किया गया।

पल्ला झाड़ रहे हैं अधिकारी
उल्लेखनीय है कि कोई भी जिम्मेदारी लेने के लिए लालायित दिखने वाले नगर निगम के अधिकारी उच्च न्यायालय के आदेश के चलते अब जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। अपर आयुक्त आरके श्रीवास्तव के पास निगम के राजस्व का प्रभार है। इन्हें पता नहीं है कि होर्डिंग्स से निगम को कमाई कितनी हो रही है। उपायुक्त एनके गुप्ता को निगम ने होर्डिंग्स प्रभारी बनाया था। सोमवार तक वे इसके घोषित प्रभारी भी थे, लेकिन उन्हें होर्डिंग्स की एबीसीडी नहीं पता। हां अगर कोई होर्डिंग्स लगवाना चाहे तो इस काम को कराने की वे हामी भर रहे हैं। श्री गुप्ता कहते हैं कि समय-सीमा (टीएल) बैठक में होर्डिंग्स की जिम्मेदारी अब सत्यपाल सिंह चौहान को दी गई है। हालांकि निगमायुक्त ने सत्यपाल सिंह चौहान के लिए कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया है। इस बारे में श्री चौहान से संपर्क नहीं हो सका।
एक हजार होर्डिंग हैं शहर में
निगम सूत्रों ने बताया है कि नगर निगम के सभी ६६ वार्डों में करीब एक हजार होर्डिंग हैं। इनमें पुराने ६६ वार्डों में होर्डिंग की संख्या ८४० है। जबकि शेष छह नए वार्डों में करीब १३० से १५० होर्डिंग होना बताए गए हैं। सूत्र का कहना है कि इन नए वार्डों को मिलाकर होर्डिंग के लिए एक जोन बनाए जाने की प्रक्रिया लंबित है। एक छदाम खर्च किए बिना वित्तीय वर्ष २०१४-१५ में इन्हीं होर्डिंग से निगम खजाने को करीब सवा दो करोड़ की आय भी हुई है।

परिषद ने कर रखा है ठहराव
निगम सीमा के अन्तर्गत होर्डिंग के लिए नगर निगम परिषद ने वर्ष २००७ में एक ठहराव पारित किया था। इसी ठहराव के तारतम्य में दस जोन बनाकर उसमें १००-१०० होर्डिंग ठेकेदारों को नीलामी के आधार पर होर्डिंग लगाने की अनुमति दे रखी है। सूत्र की मानें तो इन जोन में औसतन ८० के आसपास होर्डिंग लगे हुए हैं। होर्डिंग कारोबार करने वाले करीब एक सैकड़ा लोगों ने अपना पंजीयन भी करा रखा है,लेकिन मुख्यत: दो दर्जन लोग ही इस कारोबार में हैं। अवैध होर्डिंग को लेकर पेंच यह है कि निगम ने अभी तक इस बारे में कोई परिभाषा ही नहीं गढ़ी। क्या वैध और क्या अवैध निगम अधिकारियों की नजर में सब बराबर हैं। इसीलिए निगम अधिकारी इस बिन्दु पर खुलकर बोलने से बचते रहे हैं।
कोई तो बताए वैध संख्या
नगर निगम सीमा के अंदर होर्डिंग्स खरपतवार की तरह उग आए हैं। सरकारी ही नहीं निजी जमीन, बहुमंजिला इमारतों के ऊपर भी इन्हें टंगा हुआ देखा जा सकता है। लेकिन निगम का कोई भी अधिकारी यह बताने के लिए तैयार नहीं है कि अनुशंसा से लगे हैं या बिना अनुशंसा के टांग दिए गए। कई जगह इन्हें इतनी ऊंचाई पर लगाया गया है कि वे आसपास रहने वाले या निकलने वालों की जान के लिए खतरा तक बन गए हैं। पिछले दिनों सिटी सेंटर रोड पर एक होर्डिंग के गिरने से सड़क से गुजर रही एक छात्रा गंभीर रूप से घायल हो गई थी। इसके बाद भी निगम अधिकारियों की आंख नहीं खुली है। 

Updated : 2015-04-10T05:30:00+05:30
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