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सावधान! चिटफंड कम्पनियां फिर दे रही हैं दस्तक

जिलाधीश से मांग रही व्यापार करने की अनुमति, तीन कम्पनियों के आवेदन खारिज

ग्वालियर । पिछले कुछ सालों में ग्वालियर व आस पास के क्षेत्र की भोली भाली जनता से ठगी कर करोड़ों के वारे-न्यारे करने वाली चिटफंड कम्पनियां फिर से सक्रिय होती दिख रही हैं। हालांकि उनके मंसूबों पर जिलाधीश कार्यालय ने पानी फेर दिया है। जानकारी के अनुसार चार कम्पनियों ने जिलाधीश को आवेदन देकर शहर में व्यापारिक गतिविधियां संचालित करने की अनुमति मांगी थी जिनमें से तीन को अनुमति देने से जिलाधीश ने मना कर दिया वहीं एक कम्पनी का प्रकरण अभी लंबित है।

इन कम्पनियों ने मांगी थी अनुमति

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वेल्टेक एग्री-प्रोड्यूसर लिमिटेड , उम्मीद कोरपोरेट प्रोड्यूसर लिमिटेड दिल्ली व प्रोसपेरिटी एग्रो इंडिया लिमिटेड ने जिलाधीश कार्यालय में आवेदन दिया था जो कि खारिज कर दिया गया वहीं समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टीपर्पज को-ओपरेटिव सोसायटी, पुणे, महाराष्ट्र की कम्पनी का आवेदन अभी लंबित है। जिन कम्पनियों के आवेदन खारिज हुए हैं उनके प्रभारी अधिकारियों ने आवेदन में बताया था कि उनकी कम्पनियों ने मल्टीस्टेट को-ओपरेटिव सोसायटीज एक्ट , 2002 के अन्तर्गत पंजीयन कराया है। जिलाधीश के सवाल ने खोली पोल आवेदन पर कार्रवाई करते हुए जिलाधीश पी नरहरि ने कम्पनियों के अधिकारी को पत्र लिखा और पूछा कि सोसायटीज एक्ट , 2002 के किस प्रावधान के अन्तर्गत जिलाधीश से व्यापारिक गतिविधियां संचालित करने से पहले अनुमति लेना अनिवार्य होता है। एक भी कम्पनी इस प्रश्न का जवाब नहीं दे सकी। इसी जवाब को आधार बनाते हुए जिलाधीश ने तीनों कम्पनियों का आवेदन खारिज कर दिया। उन्होंने अपने आदेश में लिखा है कि जिस प्रकार से कम्पनियां यह बताने में असमर्थ रहीं कि उन्हें अनुमति लेने की आवश्यकता क्यों है , उससे ऐसा प्रतीत होता है कि कम्पनियां जिलाधीश से अनुमति लेकर चिटफंड का ही कारोबार करना चाहती हंै।
जिलाधीश से अनुमति के मायनेग्वालियर में चिटफंड कारोबारियों के विरुद्ध हुई कड़ी कार्रवाई का श्रेय तत्कालीन जिलाधीश आकाश त्रिपाठी को जाता है। ऐसे में कारोबारियों ने जिलाधीश से ही व्यापारिक गतिविधि संचालित करने के लिए अनुमति मांगी ताकि बाद में कोई परेशानी आए तो जिलाधीश से मिली अनुमति का हवाला देकर बचा जा सके।

इनका कहना है

कम्पनियां यह बताने में असमर्थ रहीं कि वह कौन से प्रावधान के अन्तर्गत अनुमति मांग रही हैं। साथ ही कम्पनियां यह भी नहीं बता पार्इं कि उनका व्यापार किस तरह से चिटफंड कारोबार से अलग है।

पी. नरहरि, जिलाधीश

Updated : 2015-03-31T05:30:00+05:30
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