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मुझे पता है कि वनडे में कैसे खेलना है : सुरेश रैना

मेलबर्न | नाकआउट चरण से पहले शतक जमाकर आत्मविश्वास से ओतप्रोत सुरेश रैना का मानना है कि विश्व कप 2011 के बाद से पिछले चार साल में अलग अलग हालात में बल्लेबाजी करके वह अधिक परिपक्व बल्लेबाज हो गए हैं। रैना ने जिम्बाब्वे के खिलाफ पिछले मैच में शतक जमाने के अलावा पाकिस्तान के विरूद्ध पहले मैच में अर्धशतक जमाया था।
उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ 19 मार्च को होने वाले क्वार्टर फाइनल से पहले कहा ‘ मैं 2011 के बाद से एक खिलाड़ी के तौर पर काफी परिपक्व हो गया हूं। मैने महेंद्र सिंह धोनी, युवराज सिंह और मोहम्मद कैफ जैसे खिलाड़ियों से बहुत कुछ सीखा। मैने उनके साथ काफी मैच खेले और चौथे, पांचवें , छठे नंबर पर बल्लेबाजी की। मुझे पता है कि वनडे में कैसे खेलना है।’ भारतीय बल्लेबाजों ने टूर्नामेंट में अभी तक बेहतरीन प्रदर्शन किया है और रैना को खुशी है कि जिम्बाब्वे के खिलाफ उन्होंने बड़ी पारी खेली ।
उन्होंने कहा ,‘ मुझे खुशी है कि जिम्बाब्वे के खिलाफ मैने बड़ी पारी खेली। टीम की जरूरत के समय अच्छा खेलकर बहुत खुशी होती है। मैं खुशकिस्मत भी रहा । मैं एम एस के साथ बल्लेबाजी कर रहा था और उन्होंने मुझसे कहा कि उसी पर फोकस करो जो तुम पिछले कई साल से कर रहे हो। अपना स्वाभाविक खेल दिखाओ।’ रैना ने कहा कि दबाव के हालात में वह अच्छा प्रदर्शन करता है और बांग्लादेश के खिलाफ भी जरूरत पड़ने पर ऐसा ही करेगा।
बांग्लादेश के बारे में पूछने पर रैना ने कहा कि वह उसे हल्के में नहीं लेंगे लेकिन 2007 की हार के बारे में भी नहीं सोच रहे हैं। उन्होंने कहा ,‘आप बांग्लादेश को हलके में नहीं ले सकते। उन्होंने भारत के खिलाफ विश्व कप और एशिया कप ( 2012 ) में अच्छा प्रदर्शन किया है। उनका अपना टूर्नामेंट बीपीएल भी है लिहाजा उन्हें पता है कि वनडे क्रिकेट कैसे खेलनी है। जहां तक हमारा सवाल है तो हम 2007 के बारे में नहीं सोच रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि आस्ट्रेलिया में बिताये गए समय से उन्हें दूसरी टीमों की तुलना में फायदा हुआ है क्योंकि उन्होंने यहां दो वनडे के अलावा एक टेस्ट मैच भी खेला है।
रैना ने यह भी कहा कि 19 मार्च के बाद से हर मैच करो या मरो का है और भारतीय टीम कोई कोताही नहीं बरतेगी। उन्होंने कहा ,‘ हमारे लिये यह बड़ा मैच है। हमें हर हालत में जीतना है और सभी विभागों में अच्छा प्रदर्शन करना होगा। टीम में आत्मविश्वास कूट कूटकर भरा है क्योंकि हर खिलाड़ी को अपनी भूमिका पता है। हम आत्ममुग्ध नहीं होते और अनुशासित प्रदर्शन में विश्वास करते हैं ।’

Updated : 2015-03-18T05:30:00+05:30
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