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पीडि़त किसानों के साथ सड़क पर उतरे नेता

मौ, निप्र। सप्ताह भर से लगातार हो रही बारिश के बाद विगत 15 व 16 मार्च की रात भीषण आंधी-पानी के साथ हुई ओलावृष्टि से राजस्व सर्किल मौ के दो दर्जन से भी ज्यादा गांवों में खड़ी रबी फसलें बुरी तरह से नष्ट हो गई हैं। जिला प्रशासन की राजस्व व कृषि विभाग की टीमों द्वारा फसलों के नुकसान का सही आकलन न किए जाने से आक्रोषित किसानों के साथ मंगलवार को मौ के विभिन्न राजनैतिक दलों के नेता व कार्यकर्ता नगर के प्रमुख मार्गों से जुलूस के रूप में मौ टप्पा तहसील कार्यालय पर पहुंचे, जहां प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस अवसर पर कांग्रेस पार्टी की ओर से एक ज्ञापन एसडीएम गोहद के नाम दिया गया। ज्ञापन में ओलावृष्टि एवं बारिश से नष्ट हुई फसलों का सही आकलन करवाकर किसानों को मुआवजा दिलाए जाने की मांग की गई। सही सर्वे न होने पर कांग्रेस ने धरना देने की भी चेतावनी दी। ज्ञापन तहसीलदार की अनुपस्थिति में पटवारी राजकुमार को सौंपा गया। ज्ञापन देने वालों में कृषि उपज मण्डी समिति मौ के उपाध्यक्ष एवं कांग्रेस के ब्लॉक महामंत्री राजीव कौशिक, ब्लॉक उपाध्यक्ष देवेन्द्र सिंह गुर्जर, किसान कांग्रेस के प्रदीप यादव, धर्मेन्द्र बाबा, रामऔतार शिवहरे, महासचिव दीपक तिवारी, रामनिवास सोनी, चतुरी कुशवाह, मुस्ताक खां, अजीत कुमार जैन, शिवपाल सिंह गुर्जर सरपंच सहित सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल थे।बसपा ने लगाया आंकलन सही न करने का आरोपबसपा के लोकसभा प्रभारी डॉ. रणवीर सिंह यादव ने प्रेस बायान में अतिवृष्टि एवं ओलावृष्टि रूपी प्राकृतिक आपदा से प्रभावित फसलों का जिला प्रशासन की टीम द्वारा सही आकलन न किए जाने पर खेद व्यक्त करते हुए सही आकलन कराए जाने की मांग की है। डॉ. यादव ने कहा है कि प्रशासन के इस रवैये से किसान निराश होकर हतोत्साहित हो गया है।नुकसान कम आंकना सोची-समझी साजिश: लोसपालोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के जिला महासचिव एवं प्रभारी रहीस अंसारी, ब्लॉक प्रभारी टीकाराम माहौर, ब्लॉक अध्यक्ष रवि जैन ने जारी प्रेस बयान में बताया कि ओलावृष्टि से किसानों की 80 से 90 प्रतिशत फसलें खराब हो गई हैं, किसान पूरी तरह से बर्बाद हो गया है। मौके पर सर्वे करने गई कृषि और राजस्व अमले की टीमों ने किसानों के समक्ष नुकसान का आकलन भी इतना ही किया था। मगर बाद में शासन के दबाव में आकर वास्तविक सर्वे रिपोर्ट को खारिज कर नुकसान को 12 से 15 फीसदी की रिपोर्ट जिला प्रशासन के माध्यम से शासन को भेज दी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अधिकारियों ने जान बूझकर नुकसान का कम आकलन कर किसानों को मुआवजा के हक से वंचित कर दिया है।











Updated : 2015-03-18T05:30:00+05:30
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