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सार्वजनिक धन के उपयोग पर विधायी नियंत्रण और पर्यवेक्षण जरूरीः महाजन

सार्वजनिक धन के उपयोग पर विधायी नियंत्रण और पर्यवेक्षण जरूरीः महाजन

नई दिल्ली। सार्वजनिक धन के उपयोग पर विधायी नियंत्रण और पर्यवेक्षण की अनिवार्यता पर जोर देते हुये लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने आज कहा कि विगत वर्षों में सरकारी उपक्रमों ने सतत प्रयासों के साथ राष्ट्र का निरंतर निर्माण किया है और ये वृद्धि और विकास की शक्ति की भूमिका में रहें है।
श्रीमती महाजन ने संसदीय सौध में सरकारी उपक्रमों संबंधी संसदीय समिति की स्वर्ण जयंती के उपलक्ष में संसद और राज्य और केन्द्र शासित प्रदेशों के विधानमंडलों की सरकारी उपक्रमों संबंधी समितियों के सभापतियों के अखिल भारतीय सम्मेलन का उद्घाटन किया।
उन्होंने महसूस करते हुये कहा कि संसद और राज्य विधानमंडलों के लिये यह अनिवार्य है कि वे यह सुनिश्चित करें कि इन उपक्रमों के कामकाज में शामिल सार्वजनिक धन का दुरूपयोग न होने पाये। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी उपक्रमों की संबंधी समिति ने विगत वर्षों में इन उपक्रमों पर नियंत्रण और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिये एक प्रभावकारी तंत्र के रूप में कार्य किया है।
उन्होंने इस बात का उल्लेख करते हुये कहा कि देश की अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के साथ ही, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को अब घरेलू निजी क्षेत्र की कपंनियों तथा विशाल बहुराष्ट्रीय निगमों, दोनों से ही कडी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। इस प्रकार से अब सरकारी उपक्रमों के लिये यह अनिवार्य है िकवे बेहतर कार्य निष्पादन के माध्यम से आर्थिक रूप से व्यवहार्य उद्यमों के रूप में अपने अस्तित्व को सार्थक करें और उसे न्यायसंगत ठहराएं। इस संबंर्ध में, सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति को यह सुनिष्चित करना होगा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम न केवल परिभाषित सामाजिक-आर्थिक उद्देश्यों के अनुरूप कार्य करें अपितु निजी क्षेत्र में भी अपने प्रतिद्वंदियों से आगे निकलें।
लोकसभा अध्यक्ष ने जोर देते हुये कहा कि कि संसद में सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति ने कई अध्ययन किये है और सिफारिशें प्रस्तुत की हैं जिनका सरकारी उपक्रमों के कामकाज और प्रबंधन पर दूरगामी प्रभाव पड़ा हैं। ऐसा करने में, समिति ने उपक्रमों के कामकाज के अनेक साझा क्षेत्रों को शामिल किया है, जैसे परियोजना की आयोजना और कार्यान्वयन, संगठन और प्रबंधन, वित्तीय और उत्पादन प्रबंधन, कार्मिक और मानव संसाधन प्रबंधन आदि। समिति की मूल्यवान सिफारिशों का कार्यान्वयन करके सरकार के स्वामित्व वाले अनेक उद्यम उन समस्याओं का समाधान करने में सफल हुये हैं जिनका सामना वे पहले से ही करते आ रहे थे।
लोकसभा अध्यक्ष ने सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति के स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में एक स्मारिका भी जारी की। इस दो दिवसीय सम्मेलन में संसद और राज्य विधानमंडलों की सरकारी उपक्रमों संबंधी समितियों के सभापति और सदस्य भाग ले रहे हैं।

Updated : 2015-03-14T05:30:00+05:30
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