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बोगस फर्में बनीं चेम्बर चुनाव में रोड़ा

*एक दिन में जुड़ी थीं 900 फर्म
*जांच हुई तो 1000 फर्में हो सकती हैं बाहर

ग्वालियर। बोगस फर्मों के मामले को लेकर चेम्बर के चुनाव एक बार फिर टलते दिखाई दे रहे हैं। यदि न्यायालय के आदेशानुसार इन फर्मों की जांच- पड़ताल हुई तो 500 से 1000 फर्म चेम्बर से बाहर हो सकती हैं। जानकारी के अनुसार 31 मार्च 2010 को एक ही दिन में लगभग 900 फर्मों को चेम्बर से जोड़ा गया था। सूत्रों की माने तो इसके पीछे कुछ लोगों द्वारा चुनाव में अपनी स्थिति मजबूत करना प्रमुख कारण रहा था। जबकि फर्मों को जोडऩे से पहले इनका भौतिक सत्यापन आवश्यक था जो नहीं किया गया। बताया जाता है कि फर्मों को इसी तरह जोडऩे का का कार्य काफी लम्बे समय तक चलता रहा लेकिन रिकार्ड में इन्हें 31 मार्च 2010 को ही चेम्बर से जुडऩा बताया गया। सूत्रों कहना है कि यदि टिन या पेन कार्ड नंबर आदि से ऑनलाइन जांच करते हैं या फर्मों का असतित्व प्रमाण पत्र मांगा जाता है तो पता चल जाएगा कि कितनी फर्में बोगस हैं। लेकिन इस जांच-पड़ताल में लगभग छह माह का समय लग सकता है।
स्कूटनी में लग सकता है लम्बा समय
जानकारी के अनुसार यदि सदस्य रवि गुप्ता के मामले को लेकर चेम्बर न्यायालय के आदेश के तहत 3068 फर्मांे की स्कूटनी करता है तो इसमें लम्बा समय लग सकता है। इस स्थिति में 25 अप्रैल को चुनाव होना मुश्किल दिखाई दे रहा है। उल्लेखनीय है कि 25 फरवरी को आयोजित चेम्बर कार्यकारिणी की बैठक में चेम्बर अध्यक्ष विष्णु प्रसाद गर्ग ने चुनाव के लिए 25 अप्रैल की तिथि घोषित की थी। इसके अनुसार एक अप्रैल को चेम्बर चुनाव की अधिसूचना जारी होना थी।
तो 31 मार्च को हो सकता था चुनाव
चेम्बर कार्यकारिणी के सदस्यों ने अध्यक्ष से मांग की थी कि चेम्बर चुनाव 31 मार्च को कराए जाएं। यदि चुनाव की तिथि 31 मार्च घोषित होती तो लगभग पांच मार्च को अधिसूचना लग जाती और चेम्बर चुनाव 31 मार्च को कराए जा सकते थे।

साजिश का आरोप

चेम्बर के कार्यकारिणी सदस्यों का आरोप है कि चेम्बर चुनाव की तिथि 25 अप्रैल घोषित करना एक सोची-समझी सााजिश है। इसके अनुसार चेम्बर चुनाव में किसी भी प्रकार से रोक लगाई जा सकती है।
यह है मामला
* चेम्बर सदस्य रवि गुप्ता ने 13 फरवरी 2014 को बोगस फर्मों को लेकर न्यायालय में रिट दायर की थी।
* न्यायालय ने 30 अगस्त 2014 को रजिस्ट्रार फर्म एण्ड सोसायटी से कहा कि वह इस मामले को निपटाए।
* 24 दिसम्बर 2014 को निर्मल जैन की बोगस फर्म की शिकायत पर फर्म एण्ड सोसायटी ने आदेश दिया कि शिकायत के निराकरण तक चुनाव लंबित रहेंगे।
* फर्म एण्ड रजिस्ट्रार ने 7 जनवरी 2015 को चेम्बर को पत्र लिखा कि वह बोगस फर्मों की जांच करें तभी चुनाव होंगे।
* 28 जनवरी 2015 को रवि गुप्ता के वकील ने चेम्बर अध्यक्ष व सचिव को नोटिस दिया कि वह 29.1.15 की कार्यकारिणी में चुनाव की घोषणा नहीं करें, नहीं तो उनकी घोषणा को न्यायालय की अवमानना माना जाएगा। अत: इस कार्यकारिणी में चुनाव की कोई बात नहीं की गई।
* 25 फरवरी 2015 को निर्मल जैन सहित तीन लोगों ने जब स्पष्ट आदेश जारी करने की बात कही तो फर्म एण्ड सोसायटी ने आदेश जारी किया कि हमारे कार्यालय से चेम्बर चुनाव पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। निर्मल जैन सहित अन्य के आवेदन पर चेम्बर संविधान के अनुसार कार्रवाई की।

यह है गड़बड़

* चेम्बर में आज भी कई फर्में असतित्व में नहीं है। लेकिन उनके प्रतिनिधि हैं और वह अपने वोट का उपयोग कर रहे हैं। जो कि अवैधानिक है।
* चेम्बर में 100 से 125 आजीवन सदस्य हैं। लेकिन 75 प्रतिशत आजीवन सदस्य असतित्व में नहीं हैं।
* चुनाव के समय सदस्यता शुल्क अधिक होने पर फर्मों को बेचा भी जाता है।

बोगस फर्मों के मामले को लेकर चेम्बर के चुनाव एक बार फिर टलते दिखाई दे रहे हैं। यदि न्यायालय के

Updated : 2015-03-10T05:30:00+05:30
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