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दर्द से तड़पता रहा मरीज, नहीं मिला इलाज

ग्वालियर | सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को किस प्रकार मुश्किलों से गुजरना पड़ता है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण गुरुवार को मुरार स्थित जिला अस्पताल में देखने को मिला। यहां इलाज कराने पहुंचे ओरंगाबाद निवासी सुनील शर्मा अस्पताल में तड़पते रहे तथा वहां उपस्थित कर्मचारियों से इलाज के लिए गुहार लगाते रहे, लेकिन उसका दर्द चिकित्सकों को नहीं दिखा। मरीज सुनील शर्मा गुरुवार को गोवा एक्सप्रेस से ग्वालियर अपने परिजनों से मिलने आए थे, लेकिन ट्रेन में उनका मोबाइल व पर्च चोरी हो गया और ग्वालियर पहुंचते ही उनके पेट में दर्द भी होने लगा तो वह जिला अस्पताल इलाज कराने के लिए पूर्वान्ह लगभग 11 बजे पहुंचे, लेकिन अस्पताल की ओपीडी में उन्हें एक भी चिकित्सक नहीं मिला तो वह इमरजेंसी में पहुंचे। वहां भी उन्हें एक भी चिकित्सक नहीं मिला। यहां तक कि वह दर्द से रोने लगा और उपस्थित कर्मचारियों से इलाज की गुहार लगाते-लगाते जमीन पर भी गिर पड़ा, लेकिन फिर भी चिकित्सकों द्वारा उसे दोपहर 1.30 बजे तक भर्ती नहीं किया गया।


खुले में फैंका जा रहा है बायोमेट्रिक कचरा


अस्पताल में आने वाले मरीजों एवं भर्ती मरीजों को संक्रमित बीमारियां अपनी चपेट में न ले सकें। इस दृष्टि से अस्पतालों से निकलने वाले बायोमेडिकल कचरे को सुरक्षित ढंग से डिस्पोजल इंसीनरेटर से नष्ट करने के सर्वोच्च न्यायालय ने सख्त निर्देश दिए हैं, लेकिन जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों और भर्ती मरीजों के प्रति स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा घोर लापरवाही बरती जाती हैं, जिसके चलते मरीजों को इन दिनों संक्रमित बीमारियां हो सकती हैं। अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 500 से 800 मरीज इलाज के लिए आते हैं, साथ ही अस्पताल में लगभग 100 से अधिक मरीज भर्ती रहकर भी इलाज कराते हैं। अस्पताल में मरीजों के जख्मों से निकलने वाली पट्टी, रुई, सिरिंज, एम्पूल आदि कचरे में शामिल होते हैं। जिसको सफाई कर्मचारी अस्पताल परिसर के पार्किंग में रखे नगर निगम के कचरे के डिब्बे में डाल कर सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का खुला उल्लंघन कर रहे हंै। बायोमेडिकल कचरे को खुले में फेंकने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में मरीजों के अलावा अटेंडर और अस्पताल स्टाफ में बीमारी फैलने की संभावना बनी हुई है।


शौचालय चौक, अधिकारियों ने झाड़ा अपना पल्ला

जिला अस्पताल में भर्ती मरीज इन दिनों खतरे के बीच रह कर इलाज कराने के लिए विवश हैं। अस्पताल में विगत 25 दिनों से दूसरी मंजिल पर बने आईसीयू के बाहर शौचालय का पाइप चौक हो गया था, जिसके चलते आईसीयू के बाहर बने पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में भर्ती मरीजों को शौच जाने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यहां तक कि दूसरी मंजिल पर पानी भरने के कारण अस्पताल की दीवारों में भी काफी पानी भर गया है, जिससे कभी भी मरीजों के साथ कोई बड़ी घटना घट सकती है। इस मामले पर अधिकारी शौचालय के पाइप को सही कराने की जगह अपने काम से बच रहे हैं। अधिकारियों ने पीडब्ल्यूडी और पीआईयू को शौचालय के पाइप को सही कराने के लिए पत्र भी लिखा है, लेकिन कोई भी विभाग शौचालय के पाइप को सही करने के लिए सामने नहीं आ रहा है। इस संबंध में जब अस्पताल के आरएमओ से बात की गई तो उनका कहना है कि हमारी तरफ से पीडब्ल्यूडी और पीआईयू दोनों विभागों को पत्र भेजा दिया गया है, लेकिन कोई विभाग काम करने को तैयार ही नहीं हो रहा है। यहां तक कि सिविल सर्जन द्वारा भी दोनों विभागों को पत्र भेजे जा चुके हैं


''हमारे पास आरएमओ द्वारा एक पत्र आया था, लेकिन जिला अस्पताल का भवन अभी तक हमारे आधिपत्य में नहीं आया है तो हम कैसे काम कर सकते हैं। हमने आरएमओ को पत्र का जवाब भेज दिया है।''
संजय राठौर
सब इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी

''हमने जिला अस्पताल के भवन का निर्माण कराकर अस्पताल को सौंप दिया था। फिर अस्पताल प्रबंधक द्वारा पीडब्ल्यूडी विभाग को क्यों नहीं सौंपा गया। हमारा काम अस्पताल के भवन का निर्माण कराना ही था। शौचालय का पाइप चौक है तो इसमें हम कुछ नहीं कर सकते।''
अष्टपुत्रे
संभागीय परियोजना यंत्री

Updated : 2015-12-04T05:30:00+05:30
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