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बीपीएल राशनकार्ड मामले में नपाध्यक्ष की मुश्किलें बढ़ी

प्रथम दृष्टया आरोप प्रमाणित, एसडीएम ने कथन के लिए मुन्नालाल को किया तलब

शिवपुरी। बीपीएल राशन कार्ड मामले में नगर पालिका अध्यक्ष मुन्नालाल कुशवाह की मुश्किलें बढ़ती हुई नआ रहीं हैं। सूत्र बताते हैं कि एसडीएम नीतू माथुर ने प्रथम दृष्टया उन्हें दोषी करार दिया है। बीपीएल की 2004 की सर्वे सूची में मुन्नालाल कुशवाह का नाम हैं। चार माह पहले सूचना के अधिकार के तहत बीपीएल सूची प्राप्त की गई थी। उसमें मुन्नालाल कुशवाह का नाम यथावत था। लेकिन अब जो ताजा बीपीएल पंजी प्राप्त हुई है उसमें नाम उनका काट दिया गया है। सूत्र बताते हैं कि कम्प्यूटर जाहिर कर रहा है कि जानकारी 21 दिसम्बर को काटी गई है। यही नहीं मुन्नालाल कुशवाह के एक बीपीएल कार्ड में जिसमें उनका सिंगल नाम है, मार्च 2014 से दिसम्बर 2015 तक 5 कि. प्रतिमाह के हिसाब से 115 किलो. खाद्यान्न प्राप्त किया गया है। जबकि दूसरे बीपीएल कार्ड में जिसमें मुन्नालाल सहित उनके परिवार के सात सदस्य हैं, मार्च 2014 से दिसम्बर 2015 तक 23 माह में 670 किलो खाद्यान्न प्राप्त किया गया है। इसके अलावा एसडीएम के हस्ताक्षर से मुन्नालाल का नाम बीपीएल सूची से बिलोपित नहीं हुआ है और वहीं उनका बीपीएल राशन कार्ड भी जमा नहीं हुआ है। इस मामले में अब सिर्फ नपाध्यक्ष मुन्नालाल कुशवाह के कथन लिए जाने हैं। एसडीएम ने उन्हें बयान देने के लिए आज तलब किया है। संभावना व्यक्त की जा रही है कि कल तक जांच कर एसडीएम नीतू माथुर अपनी रिपोर्ट कलेक्टर राजीव दुबे को सौंप देंगी।
नगर पालिका अध्यक्ष मुन्नालाल कुशवाह बीपीएल राशन कार्ड के साथ-साथ एपीएल राशनकार्ड धारक भी हैं। उनके अलावा उनके पुत्र सोनूमल कुशवाह और उनकी पत्नी कविता कुशवाह के नाम भी एपीएल राशन कार्ड हैं। नियमानुसार एक हितग्राही को एक साथ बीपीएल और एपीएल राशन कार्ड आवंटित नहीं हो सकते हैं। यदि वह बीपीएल राशनकार्ड धारक हैं तो वह एपीएल राशनकार्ड बनबाने के लिए पात्र नहीं है और यदि एपीएल राशनकार्ड धारक हैं तो उसका बीपीएल राशनकार्ड नहीं बन सकता। लेकिन नपाध्यक्ष मुन्नालाल कुशवाह के पास रिकार्ड के अनुसार दो बीपीएल राशनकार्ड के साथ एक एपीएल राशन कार्ड भी है।
हालांंकि मुन्नालाल कुशवाह कहते हैं कि उनके पास बीपीएल राशनकार्ड तब था जब वह गरीब थे और 2008 में उन्होंने राशनकार्ड निरस्त करवाने के लिए आवेदन दे दिया था, लेकिन बीपीएल राशन कार्ड निरस्त होने की प्रक्रिया यह है कि उसमें निरस्ती पर हस्ताक्षर एसडीएम द्वारा किये जाते हैं। लेकिन मुन्नालाल कुशवाह के मामले में बीपीएल राशनकार्ड एसडीएम द्वारा निरस्त नहीं किया गया, लेकिन बीपीएल राशन कार्ड की 2004 की जो सर्वे सूची सामने आई हैं उसमें मुन्नालाल कुशवाह का नाम बीपीएल सूची में है। यह मामला प्रकाश में आने के बाद एसडीएम नीतू माथुर ने नगर पालिका के बीपीएल, एपीएल के रिकार्ड को जब्त करने के लिए तहसीलदार मिश्रा को भेजा और रिकार्ड में यह नजर आया कि मुन्नालाल कुशवाह का नाम बीपीएल सूची से काटा गया है। लेकिन उस काटे गए नाम पर किसी के न तो हस्ताक्षर है और नहीं उस पर नाम काटे जाने की तिथि अंकित है।
सूत्र बताते हैं कि चार माह पहले सूचना अधिकार के तहत जो जानकारी प्राप्त की गई उसमें बीपीएल सूची में बकायदा मुन्नालाल कुशवाह का नाम दर्ज था और उसे विलोपित नहीं किया गया था। इससे स्पष्ट है कि मुन्नालाल कुशवाह नपाध्यक्ष होते हुए बीपीएल सूची में थे। लेकिन नपाध्यक्ष पद के लिए फार्म में उन्होंने इसका कोई उल्लेख नहीं किया था।

Updated : 2015-12-24T05:30:00+05:30
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