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सालभर बाद भी नहीं मिली स्वीकृति

मुख्यमंत्री नलजल योजना के तहत ग्रामीणों की राशि अटकी

अशोकनगर | शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए भले शासन स्तर पर कई योजनाएं तैयार की गई हों मगर जिले में ऐसी सभी योजनाएं विभागीय लापरवाही के कारण दम तोड़ती जा रहीं हैं। बीते वर्ष शासन की मुख्यमंत्री नलजल योजना का आगाज जिले में हुआ। जिस पर जिले के दूरस्थ गांवों के रहवासियों ने उम्मीद के साथ पेयजल सुविधा के लिए पीएचई विभाग को हजारों की राशि भी जमा कराई। परंतु पूरा साल बीत जाने के बाद भी इस योजना की फाइलों को हरी झण्डी नही मिल सकी है।
योजना की शुरूआत में जिले की चारों विकासखण्डों से एक-एक गांव को शामिल किया गया था। मगर साल बीत गई लेकिन योजना का अभी तक कोई अता-पता ही नही है। यहां तक कि चयनित गांवों में एक वर्ष बाद भी पीएचई विभाग की नापतौल भी शुुरू नही हो पाई है। जिले में जहां इस जन उपयोगी योजना की दम टूट गई है तो वहीं पहले से चल रहीं ग्रामीण नल जल योजना तो पूरी तरह ही प्यासी हो गर्इं हैं। नल जल योजनाओं के साथ ही सबसे बढ़ी संख्या में पेयजल के मुख्य स्त्रोत हैण्डपम्प हैं वे भी सुधरने की आश में ही बंद पड़े हैं। इन सब बिगड़े हालातों की ओर पीएचई विभाग के मैदानी अमले से लेकर अधिकारियों द्वारा भी रुचि नही दिखाई जा रही है।
धरातल पर ही लगा योजना को घुन:
पेयजल योजना के लिए शासन द्वारा तैयार की गई नवीन नल योजना के मौजूदा हाल ठीक नही हैं। सरकार ने जिस मर्जी से इस महत्वाकांक्षी योजना की बुनियादी तैयार की थी। उस मान से लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा धरातल पर क्रियान्वयन नही कराया जा रहा है। ये योजना शुरू करने के पीछे सरकार ने पूरी तरह से असफल हो चुकीं पुरानी नल जल योजना से सीख लेते हुए मॉडल तैयार किया था। मगर विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते जिले मेंं ये योजना परवान चढऩे से पहले ही दम तोड़ चुकी है। इस योजना के तहत ग्रामीणों के माध्यम से ही और उनके ही सहयोग से योजना का संचालन किया जाना है। इस योजना के तहत ग्रामीणों द्वारा अंशदान लेकर उन्हें नल जल योजना की राशि स्वीकृत कराकर ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है। जिसका पूरा संचालन गांव के सभी सदस्यों सहित चयनित पदाधिकारियों से कराया जाना है।
योजना के नाम पर लिया अंशदान :
जिले में इस योजना के तहत चारों विकासखण्ड चंदेरी, ईसागढ़, मुंगावली और अशोकनगर का शुरूआत में चयन किया गया। जिसके तहत चयनित चारों गांवों में चंदेरी विकासखण्ड के कुरवांसा में आदिवासी बाहुल्य होने से ग्रामीणों द्वारा 25000 रुपये की राशि जमा कराई गई। इसी तरह ईसागढ़ विकासखण्ड के ग्राम जंघार में योजना की कुल लागत के मान से 3 प्रतिशत के हिसाब से 40000 हजार रुपये की राशि जमा करा ली गई। वहीं अशोकनगर विकासखण्ड के ग्राम खजुरियाकला में इसी तरह 40000 हजार रुपये की राशि ग्रामीणों द्वारा जमा करा दी गई। मुंगावली विकासखण्ड के ग्राम बरखेड़ा डांग के लोगों से भी 40000 रुपये की राशि जमा कराई गई। इस राशि को ग्रामीणों से पीएचई विभाग जमा कराकर भूल गया है। पूरा साल बीत जाने के बाद भी योजना अपने ठिकाने पर नही पहुंच पाई है। जबकि गांवों में पहले से ही जल्द से जल्द काम शुरू कराने का भरोसा देकर राशि हासिल की गई थी। जिसके तहत ग्राम कुरवांसा में 250000 लाख रुपये की कार्य योजना तैयार की गई। वहीं ग्राम जंघार-बरखेड़ा डांग और खजुरियाकला में 120000-120000 लाख रुपये की राशि की कार्य योजना तैयार कर ली गई थी। इस योजना की तकनीकि स्वीकृति मिलने में पूरा साल बीत गया है। अभी भी माना जा रहा है कि वर्षों बाद भी ये योजना अपने लक्ष्य को भेद पाने में शायद ही कामयाब हो पाये। इसके पीछे मुख्य कारण यही माना जा रहा है कि इस योजना के क्रियान्वयन में विभागीय अधिकारी रुचि नही दिखा रहे हैं।
कब होगा योजना श्री गणेश?:
जिले में इस पेयजल योजना को दो वर्ष का समय पूरा होने जा रहा है। इसके बाद भी योजना का श्री गणेश नही हो पाया है। उलटे विभाग ग्रामीणों को योजना से लाभान्वित करने के बजाय उन्हें भटकाने का काम कर रहे हैं। तभी तो शासन की सोच के मुताबिक यह योजना समय बीतनेे के बाद भी परवान नही चढ़ पा रही है। धरातल पर दम तोड़ती नवीन नल जल योजना की खबर गांव-गांव में पहुंच चुकी है। लेकिन लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों द्वारा इस ओर ध्यान नही दिया जा रहा है।
ग्रामीणों में असमंजस की स्थिति:
नवीन नल जल योजना की सबसे बढ़ी परेशानी यही हो रही है कि सरकारी तौर पर योजना को बना तो दिया है। मगर योजना के स्वरूप में पूर्णता खुलासा नही किया गया है। इस योजना में विभाग द्वारा समय का कोई निर्धारण नही किया गया है। जिसमें न तो योजना की शुरूआत करने और न ही कार्य करने के दौरान अवधि को तय किया गया है। जिससे ग्रामीणों को ये योजना राशि जमा कराने के बाद फांस की तरह खल रही है। जिन ग्रामीणों ने राशि जमा की है उन्हें काम कब शुरू होगा और काम कब पूरा होगा इसमें असमंजस की स्थिति में हैं। सबंधित योजना के उपयंत्री द्वारा भी समय-सीमा तय नही दर्शायी गई है। वहीं बंद योजनाओं को चालू कराने की ग्रामीणों के सामने समस्या बनी हुई है। इस योजना की प्रशासकीय स्वीकृति सहित तकनीकी कार्य के प्रति विभाग की रुचि का न होना ही मुख्य कारण माना जा रहा है।
बंद हैं गांवों में नलजल योजनाएं:
जिले में ग्रामीण नल जल योजनाओं का क्रियान्वयन पीएचई और ग्राम पंचायतों के माध्यम से किया जाता है। करीब आधा सैकड़ा से अधिक इन नल जल योजनाओं की जमीनी हकीकत पर गौर किया जाए तो कोई डेढ़ दर्जन योजनाएं ही जुगाड़ से चल पा रहीं हैं। शेष योजनाएं विभाग के रिकॉर्ड और आंकड़ों में चालू बनी हुई हैं। इन योजनाओं मेंं कहीं पाइप लाइन तो कहीं विद्युत प्रदाय सहित अन्य कारण परेशानी दे रहे हैं। जिनकी ओर विभागीय अधिकारियों द्वारा ध्यान नही दिया जा रहा है।

Updated : 2015-10-08T05:30:00+05:30
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