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देरी से जानकारी देना पड़ा महंगा ठोका 30 हजार का जुर्माना

भोपाल । मध्य प्रदेश के राज्य सूचना आयोग ने तय समय सीमा में आवेदक को चाही गई जानकारी उपलब्ध न कराने पर दो लोक सूचना अधिकारियों (पीआईओ) पर 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माने की राशि आयोग के कार्यालय में एक सप्ताह में जमा न करने पर दोनों अफसरों के वेतन से कटौती की जाएगी।
राज्य सूचना आयेाग के कार्यालय से शुक्रवार को मिली जानकारी के अनुसार मानकचंद्र राठौर ने 11 अप्रैल 2011 को नगरपालिका शिवपुरी के तत्कालीन पीआईओ व मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) एसके रैवाल से नपा अधिकारियों के विरुद्घ लंबित जन शिकायतों सहित अन्य जानकारी मांगी थी। यह अनियमितता से संबंधित थी।
इस मामले में आयुक्त आत्मदीप ने नगर निगम, बुरहानपुर के आयुक्त एसके रैवाल पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। आयुक्त आत्मदीप ने फैसले में कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम के मुताबिक चाही गई जानकारी 30 दिन में उपलब्ध कराना आवश्यक है। पीआईओ ने इसका पालन नहीं किया। उन्होंने अपीलार्थियों को शुल्क व प्रथम अपील संबंधी आवश्यक सूचना भी नहीं दी। तीन वर्ष से अधिक की अवधि गुजरने के बाद जानकारी तब मुहैया कराई गई जब आयोग ने आदेश दिया।
इसी तरह दूसरे प्रकरण में अजय परमार ने लोक निर्माण विभाग संभाग मुरैना के तत्कालीन पीआईओ व कार्यपालन यंत्री आरके गुप्ता से केंद्रीय पंजीयन व्यवस्था के तहत सी श्रेणी के पंजीयन में लगाई गई अतिरिक्त शर्त संबंधी जानकारी मांगी थी, जो नहीं दी गई। 21 जुलाई 11 को मांगी गई यह जानकारी आयोग के आदेश पर चार दिसंबर को दी गई। आयुक्त आत्मदीप ने इस विलंब के लिए गुप्ता को दोषी करार देते हुए दंडित किया। उन पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

अपीलीय अधिकारी का आदेश खारिज
दूसरे प्रकरण में अजय परमार ने पीडब्ल्यूडी संभाग मुरैना के तत्कालीन पीआईओ व कार्यपालन यंत्री आरके गुप्ता से केंद्रीय पंजीयन व्यवस्था के तहत सी श्रेणी के पंजीयन में लगाई गई अतिरिक्त शर्त संबंधी जानकारी मांगी थी, जो नहीं दी गई। 21 जुलाई 11 को मांगी गई यह जानकारी आयोग के आदेश पर 4 दिसंबर 2014 को दी गई। आयुक्त आत्मदीप ने इस विलंब के लिए गुप्ता को दोषी करार देते हुए दंडित किया। साथ ही प्रथम अपीलीय अधिकारी के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें सुनवाई में उभय पक्षों के अनुपस्थित रहने के आधार पर प्रथम अपील निरस्त कर दी गई थी। आयुक्त आत्मदीप ने इसे विधि विरुद्ध निर्णय करार देते हुए कहा कि संबंधित पक्षों के अनुपस्थित रहने पर गुण दोष के आधार पर अपील का निराकरण किया जाना चाहिए था।
सीएम पोर्टल व डेशबोर्ड बनेंगे
राज्य के सभी विभागों में ई-गवर्नेन्स और बढ़ाने के लिये सभी सरकारी विभागों को निर्देश जारी हुये हैं कि वे मुख्यमंत्री पोर्टल एवं डेशबोर्ड का विकास करें। अब इन निर्देशों के परिपालन में सभी विभाग तेजी से लग गये हैं। इस पोर्टल पर क्या-क्या जानकारी होगी यह अभी तय होना है।

Updated : 2015-01-31T05:30:00+05:30
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