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हरसी हाईलेबल घोटाले में बचे रहे श्रीवास्तव

सेवा निवृत अभियंता के घर लोकायुक्त का छापा

ग्वालियर। जल संसाधन विभाग सिंध परियोजना फेज 2 के अंतर्गत हरसी हाईलेबल परियोजना की खरीदी में वर्ष 2007-08 में जिस समय सामान खरीदी घोटाला हुआ था उस समय जी.एस.श्रीवास्तव करैरा डिवीजन के कार्यपालन यंत्री थे। घोटाला उजागर होते ही ऊंची पहुंच के चलते उन्होंने तुरंत अपना स्थानांतरण यमुना कछार के बांध सुरक्षा डिवीजन में करा लिया था। घोटाले के समय पदस्थ रहे जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों, ठेकेदारों के यहां वर्ष 2009 में इंजीनियरों आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो के छापे पड़े तो खरीदी के सूत्रधार कार्यपालन यंत्री जी.एस.श्रीवास्तव बचे रहे जबकि खरीदी के समय पदस्थ रहे अन्य कार्यपालन यंत्रियों, सहायक यंत्रियों एवं उपयंत्रियों के यहां छापामार कार्रवाई हुई। जिस समय छापा मार कार्रवाई की गई उस समय जी.एस.श्रीवास्तव के स्थान पर बरजोर सिंह यादव करैरा डिवीजन के कार्यपालन यंत्री थे। छापे में इनके बैंक लॉकर से सोने की ईंट सहित घर से करोड़ों की अनुपात हीन संपत्ति मिली थी।
ग्वालियर में मुख्य अभियंता रहे श्रीवास्तव 
हरसी हाईलेबल घोटाले के बाद जी.एस.श्रीवास्तव ग्वालियर जल संसाधन विभाग के यमुना कछार के बांध सुरक्षा डिवीजन में कार्यपालन यंत्री रहे। इसके बाद वह एस.ई. रहे तथा जी.एस. गनाबदिया के बाद उन्हें प्रभारी मुख्य अभियंता भी बनाया गया था। पारिवारिक परिस्थितयों के कारण उन्होंने अपना स्थानांतरण भोपाल करा लिया था। चार माह पूर्व वह सेवा निवृत्त हो चुके हैं। सेवा निवृत्ति के बाद वह ग्वालियर आ गए थे। जी.एस.श्रीवास्तव लम्बे समय तक शिवपुरी जिले के नरवर डिवीजन में पदस्थ रहे हैं, जहां उनके विरुद्ध अनियमितता की अनेक शिकायतें हुई थीं।
पद के दुरूपयोग का चालान पेश
जल संसाधन विभाग के सेवा निवृत्त अभियंता जी.एस.श्रीवास्तव द्वारा दतिया की राजघाट परियोजना में कार्यपालन यंत्री रहते जो अनियमितताएं एवं पद का दुरुपयोग किया गया था। इस मामले में हुई शिकायत की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो द्वारा की जा रही थी जो पूरी कर ली गई है। ब्यूरो की तरफ से पद के दुरुपयोग के मामले में न्यायालय में चालान भी पेश कर दिया है। 

Updated : 2015-01-23T05:30:00+05:30
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