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सारदा चिटफंड घोटाला : राहत की तलाश में सुप्रीम कोर्ट पहुंची बंगाल सरकार

सारदा चिटफंड घोटाला : राहत की तलाश में सुप्रीम कोर्ट पहुंची बंगाल सरकार
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नई दिल्ली | सारदा चिटफंड घोटाले में एक के बाद एक तृणमूल नेताओं की गिरफ्तारी से परेशान राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मामले की सीबीआई जांच पर अदालत से निगरानी रखने का अनुरोध किया है। पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से कांग्रेस नेता व वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की।
राज्य सरकार का आरोप है कि सीबीआई राजनीति से प्रेरित होकर काम कर रही है। इसी आरोप को लेकर तृणमूल नेता महुआ मैत्र ने अलग से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है।
उल्लेखनीय है कि, पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ पार्टी तृणमूल कांग्रेस पहले से यह आरोप लगाती रही है कि सीबीआई केंद्र सरकार के इशारे पर सारदा मामले में तृणमूल नेताओँ को गिरफ्तार कर रही है।
ऐसे में तृणमूल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस मामले में थोडी सी राहत मिलने की अपनी उम्मीदें जगाये रखने की कोशिश कर रही है।
दिलचस्प बात यह है कि सारदा मामले की सीबीआई जांच कराये जाने की मांग को लेकर जिन लोगों ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी उनमे कांग्रेस नेता अब्दुल मन्नान का नाम सबसे उल्लेखनीय रहा है। लेकिन अब राज्य सरकार की तरफ से कांग्रेस के ही एक वरिष्ठ नेता को सीबीआई के खिलाफ मामले में वकील बनाये जाने से राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गई है। इस मामले में कपिल सिब्बल के आगे आने से प्रदेश कांग्रेस पशोपेश में पड गई है।
गौरतलब है कि सारदा मामले की जांच कर रही सीबीआई अब तक की जांच के दौरान तृणमूल के कई बडे नेताओँ को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमे राज्य के परिवहन मंत्री मदन मित्र के अलावा तृणमूल सांसद सृंजय बसु व रजत मजूमदार का नाम आ चुका है।
पिछले हफ्ते सीबीआई ने तृणमूल के महासिचव मुकुल राय को भी समन भेज कर पूछताछ के लिय तलब किया था। वे अब तक सीबीआई के समक्ष हाजिर नहीं हुए हैं।

Updated : 2015-01-19T05:30:00+05:30
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