Home > Archived > विमर्श

विमर्श

जागरण का पर्व

  • अतुल तारे


देशभर में इन दिनों शक्ति की आराधना का पर्व श्रद्धा एवं उमंग के साथ मनाया जा रहा है। नवरात्रि पर्व में जागरण का अत्यंत महत्व है। जागरण का अर्थ क्या है? सामान्यत: कहा या माना यह जाता है कि देवी मां की आराधना में, अर्चना में रातभर जागते हुए अपनी आस्था एवं भक्ति का प्रगटीकरण करना। ध्यान से विचार करें तो रात्रि जागरण का अपना यह एक सांकेतिक महत्व है। रात याने अंधेरा और अगर अंधेरा है तो सतर्क रहना होगा। सजग रहना होगा, जागरण करना होगा। शक्ति की आराधना का यह पर्व यही संदेश देता है कि हम आज के परिप्रेक्ष्य में विचार करें कि कौन महिषासुर है, कौन रावण है और इनके संहार के लिए हमें किस प्रकार सज्ज होना है। नवरात्रि पर्व के प्रकाश में क्या यह उचित अवसर नहीं कि देशवासी आज के परिप्रेक्ष्य में विचार करें कि वह जाग रहे हैं या सो रहे हैं। जागने का अर्थ सिर्फ रात काली करने का ही नहीं है। जागने का अर्थ अपने कर्तव्यों के प्रति सचेत होना है। अच्छे दिन आएंगे यह आज एक प्रचलित लोकप्रिय मुहावरा सा हो गया है। पर क्या अच्छे दिन लाने का कोई ठेका है जो किसी सरकार के भरोसे पर छोड़ दिया जाए। 2014 के आम चुनाव में देश के मतदाताओं ने सिर्फ जागरण ही नहीं किया. जन जागरण भी किया। एक भारत श्रेष्ठ भारत, समर्थ भारत की रचना का संकल्प लेकर एक सकारात्मक जनादेश दिया। देश भर की सज्जन शक्तियों ने एक अभियान चलाया अधिकतम मतदान के लिए। परिणाम भी सामने आया रिकॉर्ड मतदान हुआ। अच्छे दिन की नींव रखी गई। पर यहां पर देशवासियों का काम समाप्त नहीं हुआ था। यह शुरुआत थी। पर लग ऐसा रहा है कि जागरण का पर्व या अभ्यास आम चुनाव के बाद समाप्त हो गया। सौ दिन के भीतर हुए उपचुनावों में मतदान का प्रतिशत फिर तुरंत गिर गया। यह मान लिया गया कि अब तो अच्छे दिन आ ही गए हैं तो क्यों घर से निकला जाए। इधर सात्विक शक्तियों ने विश्राम किया और आसुरी ताकतों को एकजुट होने का अवसर मिला, परिणाम जिन ताकतों को देश ने एक मत से खारिज कर दिया था, उन्हें संजीवनी मिल गई। आज वह यह प्रचारित करने में सफल हो रहे हैं कि हम भी मैदान में हैं और संघर्ष अभी बाकी है और यह एक सच भी है। देश इस समय कुरुक्षेत्र का रण है। सज्जन एवं आसुरी शक्तियों में निर्णायक संघर्ष चल रहा है। हर बार, हर पल कोई जगाने आएगा और जब जागाएगा तभी जगेंगे यह स्वभाव अच्छा नहीं है। अलार्म घड़ी में तब लगाया जाता है जब सुबह ठीक समय पर उठने की आदत न हो। आम चुनाव के समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने परिश्रम की पराकाष्ठा की। बाबा रामदेव हों या श्री श्री रवि शंकर गायत्री शक्ति पीठ हो या देश की संत शक्ति सभी ने एक सकारात्मक परिवर्तन के लिए अपना योगदान दिया। पर अब ये सारी शक्तियां हर बार हाथ में घंटी लेकर हमें जगाने आएं यह आवश्यक नहीं, वांछनीय भी नहीं। जागरण हमें ही करना है। कारण रावण अभी मरा नहीं है और जब तक रावण का सम्पूर्ण नाश नहीं होता तब तक विजया दशमी के पर्व का औचित्य क्या? यह नौ दिन हमें इसी जागरण के अभ्यास के लिए हैं। यह नौ दिन इसी हेतु शक्ति संचय के लिए है क्या हम नवरात्रि के पर्व पर सही अर्थों में जागरण का संकल्प लेंगे? शुभ नवरात्रि।

Updated : 2014-09-29T05:30:00+05:30
Next Story
Share it
Top