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सिंधिया कन्या विद्यालय प्रकरण, हर हाल में बेटी को न्याय दिलाऊंगी

ग्वालियर। 'आज के माहौल में हर व्यक्ति मानसिक दबाव में है। यदि आज मानवी को एन्जायटी एवं डिप्रेशन से पीडि़त बताया जा रहा है तो विद्यालय प्रबंधन को स्वयं का और विद्यालय के अन्य बच्चों का भी टेस्ट कराना चाहिए। ऐसी स्थिति में पूरा प्रबंधन एन्जायटी और डिप्रेशन का शिकार निकलेगा। विद्यालय प्रबंधन द्वारा मेरी बेटी को विद्यालय से निकालने के लिए जो कूट रचना की है, यदि जिला प्रशासन से न्याय न मिला तो विद्यालय प्रबंधन के विरुद्ध मानहानि का दावा करूंगी। सीबीआई से मान्यता रद्द कराने के लिए शिकायत की जाएगी साथ ही मानवी के मौलिक और संवैधानिक अधिकारों के हनन के लिए विद्यालय प्रबंधन को न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।
सिंधिया कन्या विद्यालय की 9वीं कक्षा की छात्रा मानवी के स्वास्थ्य एवं शिक्षा को लेकर चल रहे विवाद के बाद स्कूल में बेटी को विशेष ट्यूशन दिलाने आई मानवी की माँ श्रीमती संध्या सिंह ने शनिवार को 'स्वदेश' से चर्चा करते हुए यह बात कही। श्रीमती संध्या सिंह का कहना था कि 19 अगस्त से मानवी हॉस्टल में रह रही थी। 28 अगस्त को प्रबंधन ने मानवी के अभिभावक बुलाए और ले जाने को बोल दिया। 28 अगस्त को ही मानवी का स्वास्थ्य परीक्षण करवा कर 29 अगस्त को प्रबंधन को रिपोर्ट सौंपी गई जो सामान्य थी। इस रिपोर्ट को भी प्रबंधन ने नहीं माना। मानवी का इसी वर्ष विद्यालय में प्रवेश हुआ था। नए माहौल में सामन्जस्य बैठाने में समय लगता है। जिसे विद्यालय प्रबंधन ने मानसिक बीमारी बता दिया।


सिरदर्द में बुखार की दवा दे रही थीं चिकित्सक
कलेक्टर न्यायालय में मानवी की ओर से इस प्रकरण में पैरवी कर रहीं उसकी अभिभाषक एडवोकेट सुधा शर्मा का कहना है कि विद्यालय प्रबंधन के अनुसार बच्ची को सिरदर्द की परेशानी थी। ऐसे में उसे दर्द निवारक दवा दी जानी चाहिए थी जबकि सिंधिया कन्या विद्यालय की चिकित्सक डॉ. चित्र उसे बुखार की दवा देकर उसका उपचार कर रही थी। स्कूल मे दर्द निवारक कोई दवा नहीं थी। उन्होंने बताया कि सिंधिया कन्या विद्यालय प्रबंधन किला स्थित सिंधिया विद्यालय में हुए आदर्श काण्ड से इतने भयभीत है कि एक स्वस्थ्य बच्चे की जिम्मेदारी भी नहीं उठाना चाहता है। परिजनों द्वारा कराए गए स्वास्थ्य परीक्षणों पर विद्यालय प्रबंधन को विश्वास नहीं है तो विद्यालय जिस चिकित्सक पर टेस्ट कराना चाहता है हम तैयार हैं। लेकिन किसी बच्चे को मानसिक रोगी कहकर स्कूल से नहीं निकाला जा सकता। यह प्रकरण प्रचारित हो जाने के बाद अब कोई भी अच्छा स्कूल मानवी को प्रवेश देने के लिए तैयार नहीं हो रहा है।

अचानक गिर पड़ी थी मानवी
सिंधिया कन्या विद्यालय के स्टाफ का कहना है कि मानवी विद्यालय के मैस में शाम के समय अचानक गिर पड़ी थी। इसके बाद प्रबंधन ने तुरंत उसे आरोग्य शाला (सिक रूम) में पहुंचाया तथा उसका उपचार किया गया। अगले ही दिन विद्यालय प्रबंधन ने परिजनों को बुलवाकर मानवी को उपचार के लिए जे जाने की बात कही।

कलेक्टर को सौंपा 24 बिन्दुओं का जवाब
सिंधिया कन्या विद्यालय प्रबंधन मानवी के विषय में कुछ भी बोलने से बच रहा है। प्रबंधन ने कलेक्टर के समक्ष 24 बिंदुओं का जबाब प्रस्तुत किया है। प्रबंधन का कहना है कि मानवी के जो टैस्ट उसके अभिभावकों द्वारा प्रबंधन के समक्ष प्रस्तुत किए गए हैं। उनमें एन्जायटी एवं डिप्रेशन की शिकायत दर्शाई गई है। ऐसे में प्रबंधन कोई खतरा नहीं उठाना चाहता है। प्रबंधन डे स्कॉलरशिप की अनुमति देना नियमों के खिलाफ मान रहा है।

'जिला दण्डाधिकारी का जो निर्णय होगा। उसके आधार पर प्रबंधन आगे की कार्यवाही करेगा। बच्चे के भविष्य का सवाल है तो उसके लिए ट्यूशन की व्यवस्था की गई है। वह आकर ट्यूशन की क्लाश ले रही है। परीक्षा में सम्मलित होने की अनुमति विद्यालय प्रबंधन ने दी है।
निशा मिश्रा, प्राचार्य, सिंधिया कन्या विद्यालय
कलेक्टर के समक्ष अपनी बात रखी है, फैसले का इंतजार है। मानवी के भविष्य का सवाल है। कोई भी प्रबंधन मध्य सत्र में बच्चे को बीमारी का बहाना बना कर स्कूल से बाहर नहीं कर सकता। स्कूल के खिलाफ मानहानि का दाबा और चारसौबीसी के केश किए जा सकते हैं। बच्चे को प्रबंधन हॉस्टल में नहीं रख सकता है तो उसे कक्षा में बैठने की अनुमति दे। सत्र समाप्त होते ही हम अपने बच्चे को किसी अन्य विद्यालय में प्रवेश दिला देगें।
सुधा शर्मा, मानवी की अभिभाषक


'विद्यालय प्रबंधन ने 28 अगस्त को मुझे बुलाया तो मैंने समझा कि सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए एसआईएस में बॉम्बे जाने के लिए मानवी का चयन हुआ है। लेकिन यहां पहुंचते ही विद्यालय प्रबंधन ने बच्ची को घर ले जाने के लिए बोल दिया। पूछने पर जवाब नहीं मिला। इसके बाद मेल पर जवाब मिला कि बच्चे को नहीं रख सकते। मैने कलेक्टर से इसकी शिकायत की।
संध्या शर्मा, मानवी की मां 

Updated : 2014-09-14T05:30:00+05:30
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