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हिमाचल प्रदेश को पूर्वोत्तर राज्यों की तर्ज पर विशेष तरजीह देने की मांग

नई दिल्ली । हिमाचल प्रदेश को पूर्वोत्तर राज्यों की तर्ज पर सड़क, रेल और उद्योगों के क्षेत्र में विशेष तरजीह देने की मांग करते राज्य सरकार ने कहा कि यह एक पहाड़ी और सीमावर्ती राज्य है। केन्द्र सरकार ने राज्य सरकार की ओर से इस संबंध प्राप्त पत्र का जिक्र करते हुये कहा कि राज्य के औद्योगिक प्रोत्साहनों के लिये विशेष पैकेजों को 12वीं योजना अवधि तक के लिये बढ़ा दिया गया है, जो पिछले साल छह जनवरी को दस साल की अवधि का विशेष पैकेज समाप्त हो गया था।
योजना, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन और रक्षा राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने राज्यसभा में जनता दल:यूः के सदस्य के सी त्यागी के सवाल का लिखित उत्तर देते हुये कहा कि योजना आयोग ने हिमाचल प्रदेश के बुनियादी ढ़ांचा विकास को बढ़ावा देने के लिये केन्द्रीय सहायता के वास्ते इसके पर्वतीय भूभाग और अल्प संसाधन आधार को ध्यान में रखा था और हिमाचल प्रदेश को विशेष श्रेणी राज्य का दर्जा प्रदान किया गया।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को पूर्वोत्तर राज्यों की तर्ज पर 90 प्रतिशत केन्द्रीय हिस्सा और 10 प्रतिशत राज्य का हिस्सा के अनुपात में केन्द्रीय सहायता प्रदान की जा रही है।
हिमाचल प्रदेश के विकास की खातिर परियोजनाओं के वास्ते उपयुक्त राशि को स्वीकृति प्रदान करने का जिक्र करते हुये सिंह ने कहा, राज्य के लिये औद्योगिक प्रोत्साहनों के लिये विशेष पैकेज, 10 वर्षो की अवधि के लिये, 7 जनवरी 2003 को प्रदान किये गये थे जो 6 जनवारी, 2013 को समाप्त हो जाना था लेकिन राज्य सरकार के अनुरोध को देखते हुये औद्योगिक प्रोत्साहनों के लिये विशेष पैकेजों को 12वीं योजना तक बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा, केन्द्र सरकार, राज्य में विभिन्न बुनियादी ढ़ांचा के सृजन के वास्ते केन्द्र-प्रायोजित स्कीमों ( सीएसएस) के साथ साथ विशेष योजना सहायता (एसपीए) एवं विशेष केन्द्रीय सहायता:एससीएः के माध्यम से कई तरीकों से राज्य को पर्याप्त सहायता प्रदान करती है।


Updated : 2014-07-17T05:30:00+05:30
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