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हेमकुंड यात्रा के भविष्य पर मंडराने लगे बादल के संकट

चमोली। आपदा के एक बर्ष बाद लाखों रूपये की लागत से गोविंदघाट में हेमकुंड जाने के लिए लोनिवि द्वारा बनाया गये वैकल्पिक पुल अलकनंदा का जल स्तर बढ़ जाने के कारण जल समाधि ले ली है। अब हेमकुंड जाने के लिए एक मात्र साधन झूलापुल रह गया है, लेकिन इस पर घोड़े- खच्चरों की आवाजाही नहीं हो सकती है। पिछले वर्ष दैवीय आपदा के दौरान गोविंदघाट का पुल अलकनंदा की भेंट चढ़ गया था। इस कारण हेमकुंड के तीर्थयात्री फंस गये थे, तब उन्हें हेलीकाप्टर से जोशीमठ भेजा गया था। उस दौर में करीब 800 से अधिक खच्चर हेमगंगा घाटी में फंस गये थे, तब बड़े आंदोलनों के बाद यहां वैकल्पिक पुल का निर्माण किया गया था।
सूबे के दो-दो मुखियाओं द्वारा भी आपदा के दौरान इस क्षेत्र का दौरा करने पर यहां पर स्थायी पुल का निर्माण किए जाने की घोषणा धरी रह गई। यहां तक की लोनिवि के मुख्य सचिव द्वारा तो माह जून तक यहां पर स्थाई पुल के निर्माण का दावा किया गया था लेकिन बावजूद इसके अभी तक स्थायी पुल तो नहीं बन पाया था पर जो वैकल्पिक पुल बना था वह भी बह गया। हेमकुंड की यात्रा भी इसी वैकल्पिक मार्ग से जारी थी किंतु अलकनंदा का जलस्तर बढ़ जाने के कारण यह पुल भी जवाब दे गया।
ईको विकास समिति गोविंदघाट के पूर्व अध्यक्ष उत्तम सिंह मेहता का कहना है कि इस पुल के अचानक देर शाम अलकनंदा की भेंट चढ़ जाने से हेमकुंड यात्रा के भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। हालांकि एक झूलापुल मौजूद तो है लेकिन उसकी क्षमता ज्यादा तीर्थयात्रियों के आवागमन को वहन करने की नहीं है।

Updated : 2014-07-13T05:30:00+05:30
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