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जनमानस

क्या कोई पाक-बांग्ला में हिन्दुओं की दुर्दशा पर ध्यान देगा?

इतिहास साक्षी है कि 1947 के बाद से पाकिस्तान में हिन्दुओं का जो हाल है वह मर-मरकर और घुट-घुट कर जीना है। साथ में जब से बांग्लादेश बना है 1971 से तभी से यहां भी हिन्दूजन खुलकर सांस नहीं ले पाते हैं। इन दोनों देशों में हिन्दुओं का जबरन धर्मान्तरण बड़े पेमाने पर और निडरता के साथ वहां के कट्टर इस्लाम के ठेकेदार हिन्दू बहन बेटियों की किसी हिन्दू लड़के से शादी नहीं होने देते हैं और लड़कियों को जबरन उठा ले जाते हैं और अपने घिनौने और क्रूर व्यवहार से उसे काला बुर्का पहना देते हैं या पहनने पर मजबूर कर देते हैं। दुष्कर्म, अपहरण, हत्या आदि जघन्य अपराध इन देशों में हिन्दुओं के साथ आए दिन या रोजाना होता रहता है। लेकिन विश्व का मानवाधिकार आयोग वहां पर अपनी आंखें बंद करे हुए है परन्तु भारत के सत्ताधारी और सारी मीडिया तो इन्सानियत की खातिर वहां के मरते-कुचलते घुटते हिन्दुओं के लिए आवाज उठा सकते हैं। लेकिन दुर्भाग्य यहां की मीडिया इस मामले में नाकारा ही नहीं असंवेदनशील साबित हुई है। अब तो मैं जालीदार टोपी पहनने वालों से पूछना चाहता हूं कि तुम्हारे अन्दर इस्लामियत के लिए ही इन्सानियत है हिन्दुओं के लिए नहीं? शर्म आती है इन सब पर आवाज ना उठाने वालों पर।
उदयभान रजक, ग्वालियर

Updated : 8 March 2014 12:00 AM GMT
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