Home > Archived > ज्योतिर्गमय

ज्योतिर्गमय

मजाक और अपमान

हंसी-मजाक एक सुरक्षा कवच है जो तुम्हें अपमान से बचाता है। यदि तुम विनोदप्रिय हो तो तुम्हारा अपमान नहीं हो सकता और यदि तुम अपने को अपमानित होने की अनुमति नहीं देते तब तुम अजेय हो जाते हो। हास्य सभी को एक साथ जोड़ता है जबकि अपमान अलग-अलग खंडित कर देता है।
अपमान और तिरस्कार से टूटे हुए समाज के लिए हास्य एक ताजा हवा के झोंके के समान है। निपुणता से किया गया हास्य तुम्हें भय और चिन्ता से मुक्त करता है।
हंसी-मजाक के साथ-साथ दूसरे का ध्यान भी रखना चाहिए और उनके लिए संवेदनशील होना चाहिए. बिना ध्यान रखे या बिना संवेदनशील हुए किया गया कोरा मजाक प्राय: उन लोगों को रुष्ट कर देता है जो तुम्हारे पास समस्या लेकर आते हैं। हास्य हमारे उत्साह को बनाये रखता है पर ज्यादा मजाक मुंह में एक बुरा स्वाद छोड़ सकता है।
बगैर ज्ञान के सिर्फ हास्य छिछला है। ज्ञान सहित हास्य से उत्सव जैसा वातावरण उत्पन्न होता है। संवेदनशीलता के बिना हास्य तीखा व्यंग्य होता है और वह समस्याओं को लेकर पलट कर तुम्हारे ही ऊपर पड़ता है. ज्ञानी हास्य का उपयोग ज्ञान पैदा करने के लिए और परिस्थितियों को हल्का करने के लिए करते हैं।
बुद्धिमान व्यक्ति हास्य का प्रयोग अपमान के विरुद्ध एक ढाल के रूप में करते हैं। निष्ठुर व्यक्ति हास्य का प्रयोग दूसरों का तिरस्कार करने के लिए एक तलवार की तरह करते हैं। गैर-जिम्मेदार व्यक्ति हास्य का उपयोग जिम्मेदारी से बचने के लिए करते हैं। मूर्ख हास्य को बहुत गंभीरता से लेते हैं। हास्यपूर्ण होने का प्रयास करना व्यर्थ है।
हास्य केवल शब्दों का खेल नहीं है, वह तुम्हारे हल्के अस्तित्व का द्योतक है। हास्य की कुशलता सौहार्दपूर्ण और स्नेहपूर्ण व्यवहार से उत्पन्न होती है, चुटकले रट कर दोहराने से नहीं। सभी के साथ अपनत्व का भाव रहे, उनके प्रति भी जो तुम्हारे प्रति मित्रवत नहीं है। योग और ध्यान का अभ्यास के साथ ईश्वर और कर्म के नियम पर अटूट विश्वास हो। जो ज्ञान में रहते हैं और हास्यकर हैं उनके साथ रहना चाहिए।

Updated : 11 Nov 2014 12:00 AM GMT
Next Story
Top