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उच्चतम न्यायालय ने यौन शोषण के मामले में पूर्व न्यायधीश को दी राहत

उच्चतम न्यायालय ने यौन शोषण के मामले में पूर्व न्यायधीश को दी राहत
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नई दिल्‍ली | उच्चतम न्यायालय ने आज लॉ इंटर्न के साथ यौन शोषण के मामले में आरोपी के पूर्व न्यायधीश स्वतंत्र कुमार को राहत दे दी है। उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में आरोपी जज को नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया है। साथ ही, यह सवाल किए है कि शिकायतकर्ता खुद वकील है, ऐसे में ढाई साल तक इस मामले में कोई शिकायत न करना समझ से परे है।
सुप्रीम कोर्ट ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों का समाधान करने के लिए न्यायिक निकायों में स्थाई तंत्र की स्थापना की मांग करने वाली पूर्व इंटर्न की याचिका पर केन्द्र को नोटिस जारी किया। शीर्ष कोर्ट ने मामले में सहायता के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता फली एस. नरीमन और केके वेणुगोपाल को न्यासय मित्र नियुक्त किया। कोर्ट ने यह साफ किया कि वह न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार के खिलाफ इंटर्न की शिकायतों पर कोई विचार व्यक्त नहीं कर रहा है। उच्चतम न्यायालय ने सवाल किया कि इंटर्न इतने विलंब से ये आरोप क्यों लगा रही है। लॉ इंटर्न ने याचिका में शीर्ष अदालत के न्यायाधीशों की बैठक में पांच दिसंबर 2013 को पारित उस प्रस्ताव को चुनौती दी है जिसमें यह फैसला किया गया था कि उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के खिलाफ किसी भी शिकायत पर गौर नहीं किया जायेगा। याचिका में इस तरह के मामलों की जांच के लिये समुचित मंच गठित करने और पूर्व न्यायाधीश ए के गांगुली के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों के मामले की तरह ही उसकी शिकायत पर भी विचार करने का अनुरोध किया गया है। याचिका में न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार, उच्चतम न्यायालय के महासचिव और केंद्र सरकार को प्रतिवादी बनाया गया है।
विदित हो कि न्यायमूर्ति कुमार इस समय राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के अध्यक्ष हैं और उन्होंने इंटर्न के आरोपों को ‘अविश्वासपूर्ण और असत्य’ करार देते हुये इसे ‘किसी तरह की साजिश’ बताया है। उच्चतम न्यायालय के प्रशासनिक पक्ष ने पांच दिसंबर के प्रस्ताव का हवाला देते हुये न्यायमूर्ति कुमार के खिलाफ इस इंटर्न की शिकायत पर विचार करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद इंटर्न ने यह याचिका दायर की है। याचिका में पांच दिसंबर, 2013 का प्रस्ताव निरस्त करने और यौन उत्पीड़न की शिकायतों पर गौर करने के लिये एक व्यवस्था स्थापित करने का अनुरोध किया गया है। न्यायमूर्ति कुमार के खिलाफ लगे आरोपों की उच्चतम न्यायालय से जांच कराने की इंटर्न की मांग का अतिरिक्त सालिसीटर जनरल इन्दिरा जयसिंह, वकील कामिनी जायसवाल, वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे और वकील वृन्दा ग्रोवर ने समर्थन किया है।

Updated : 2014-01-15T05:30:00+05:30
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