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सी-17 ग्लोब मास्टर भारी मालवाहक विमान वायुसेना में शामिल

सी-17 ग्लोब मास्टर भारी मालवाहक विमान वायुसेना में शामिल
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हिंडन | सैनिकों और टैंकों को रणक्षेत्र तक पहुंचाने के लिए वायुसेना की क्षमता को एक बड़ी मजबूती प्रदान करते हुए रक्षा मंत्री एके एंटनी ने इसके सबसे बड़े सी-17 भारी मालवाहक विमान को हिंडन हवार्ड अड्डा पर बल में शामिल किया। एंटनी ने कहा कि यह विमान सामरिक तथा गैर पारंपरिक अभियानों को भी अंजाम देगा। सी-17 ग्लोब मास्टर-3 विमान को अमेरिका से एक सौदे के तहत खरीदा गया है। इस सौदे के 20,000 करोड़ रुपये से अधिक के होने की उम्मीद है। इस विमान की एक प्रतीकात्मक चाभी रक्षा मंत्री ने इकाई के कमान अधिकारी को सौंपी।
इस मौके पर वायुसेना प्रमुख एनएके ब्राउन ने कहा कि विमान का परिचालन पूर्वोत्तर राज्यों में ‘एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड’ से और उत्तर एवं अंडमान निकोबार क्षेत्र के अत्यधिक उंचाई वाले क्षेत्रों से किया जा सकता है। सी-17 में करीब 70 टन वजन और लगभग 150 पूरी तरह से तैयार सैनिकों को ढोने की क्षमता है। यह रूसी आईएल 76 विमान का स्थान लेगा जो वायुसेना के बेड़े में अब तक का सबसे बड़ा विमान था। आईएल 76 की क्षमता करीब 40 टन वजन ढोने की है। वर्ष 2011 में हस्ताक्षर किए गए सौदे के तहत वायुसेना ने दस सी 17 विमानों का आर्डर दिया है जिनमें से तीन मिल चुके हैं। अगले साल के अंत तक अमेरिकी वायुसेना द्वारा सभी 10 विमानों की आपूर्ति कर दिए जाने का कार्यक्रम है।
सी 17 विमानों के वजन ढोने की क्षमता और कार्य क्षमता के लिहाज से वायुसेना की अभियान क्षमता में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। आपदा के दौरान राहत कार्य में भी यह उपयोगी होगा। 10 विमानों की आपूर्ति होने के बाद वायुसेना छह और विमानों की खरीददारी के विकल्प पर भी विचार कर सकता है। हाल के समय में वायुसेना ने सी 17 और सी 130 जे सुपर हरकुलेस मालवाहक विमानों को शामिल कर रूस निर्मित विमानों से अमेरिका निर्मित विमानों की ओर अपनी निर्भरता बढ़ाई है। वायुसेना छह सी 130 जे विमानों को परिचालित कर रहा है और उसकी योजना छह और विमान खरीदने की है। बल के बेड़े में रूसी अंतोनोव 32 भी है

Updated : 2013-09-02T05:30:00+05:30
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