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सांप्रदायिक हिंसा निरोध बिल का पटनायक ने किया विरोध, प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

सांप्रदायिक हिंसा निरोध बिल का पटनायक ने किया विरोध, प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
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भुवनेश्वर । मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी सांप्रदाय़िक हिंसा विधेयक को शीतकालीन सत्र में लाने के केन्द्र सरकार के प्रयास का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि एक गंभीर विषय को जल्दबाजी में पारित कराने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए और इस पर व्यापक बहस की आवश्यकता है । प्रधानमंत्री डा मनमोहन सिंह को पत्र लिख कर ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने यह बात कही है ।
अपने पत्र में पटनायक ने कहा कि प्रस्तावित बिल के संबंध में उन्होंने 17 नवंबर 2011 को लिखे पत्र में स्पष्ट रुप से कहा था कि कानून व व्यवस्था राज्य का विषय है और इस तरह के विधेयक से राज्य के अधिकारों में अतिक्रमण होगा । नये ड्राफ्ट बिल में यद्यपि कुछ संशोधन किये गये हैं लेकिन जिन विषयों पर मैने चिंता व्यक्त की थी, उन पर ध्यान नहीं दिया गया है । उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि प्रत्येक सांप्रदायिक विवाद पर न्यायिक जांच कराने का इसमें जो प्रावधान है वह सही नहीं है । इसे राज्य सरकार के विवेक पर छोड देना चाहिए कि किस मामले गंभीरता कितनी है तथा किसकी न्यायिक जांच की आवश्यकता है और किसकी नहीं है । उन्होंने इस विधेयक के अनेक प्रावधानों का विरोध करने के साथ साथ लिखा है ऐसा दिखाने का प्रयास किया जा रहा है कि सांप्रदायिक हिंसा को लेकर राज्य सरकारें चितिंत नहीं हैं व केन्द्र सरकार ही इसके लिए चिंतित है । उन्होंने कहा कि कोई एक विशेष घटना के दौरान ठीक से प्रबंधन न होने के कारण नये कानून बनाये नहीं जाने चाहिए बल्कि जमीन पर कार्य करने वाले संस्थानों को हमें मजबूत बनाना चाहिए । उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक हिंसा एक गंभीर व राष्ट्रीय महत्व का विषय है तथा इस विषय की राजनीतिक मार्केटिंग नहीं की जानी चाहिए वह भी तब जब चुनाव शीघ्र होने वाले हैं । पटनायक ने कहा कि शीतकालीन सत्र में इस प्रस्तावित विधेयक को न लाया जाए तथा इस पर व्यापक बहस करायी जाए । 

Updated : 2013-12-07T05:30:00+05:30
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