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वैश्विक स्तर से नीचे है हमारी शिक्षा प्रणाली : राष्ट्रपति

वैश्विक स्तर से नीचे है हमारी शिक्षा प्रणाली : राष्ट्रपति
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दोइमुख |
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि अगर भारत विश्व शक्ति बनना चाहता है तो देश में उच्च शिक्षा के स्तर को गिरने से बचाना अत्यंत आवश्यक है। मुखर्जी ने राजीव गांधी विश्वविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह के दौरान यहां कहा, "अगर भारत को विश्व शक्ति बनना है तो हमें शिक्षा प्रणाली को विश्व स्तर का बनाकर खुद को इसके लायक साबित करना होगा।"उन्होंने कहा कि शोध समाज में ज्ञान को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राष्ट्रपति ने कहा, "सामाजिक समस्या को सुलझाने के लिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई सोच और बेहतरीन समन्वय की जरूरत है।" उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता की ज्ञान की पुरानी परंपरा रही है और देश के तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला, वालाभी, सोमापुरा और ओदंतपुरी जैसे विश्वविद्यालय शिक्षा के प्रसिद्ध स्थल थे, जहां विदेशों से लोग अध्ययन के लिए आते थे। राष्ट्रपति ने कहा, "आज हमारा विश्वविद्यालय विश्व के बेहतरीन विश्वविद्यालयों से पिछड़ रहा है। एक अंतर्राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार, शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों एवं संस्थाओं में भारत के एक भी शामिल नहीं है।" उन्होंने कहा, "हम वैश्विक स्तर से निम्न स्तर के शैक्षणिक प्रणाली को बरकरार रखने का खतरा नहीं उठा सकते। विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्र में हमारा नेतृत्व हमारे वैज्ञानिकों, अकादमिक, इंजीनियरों और चिकित्सकों पर निर्भर करता है।"

Updated : 2013-11-30T05:30:00+05:30
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