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तेलंगाना पर गतिरोध जारी

तेलंगाना पर गतिरोध जारी
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नई दिल्ली । आंध्र प्रदेश को विभाजित कर पृथक तेलंगाना राज्य गठित करने के फैसले के बाद से ही आंध्र की हालत अनियंत्रित होती जा रही है। लगातार हड़ताल, बंद और प्रदर्शनों के चलते वहां की हालत बेकाबू होती जा रही है। बिजली विभाग के कर्मचारियों के हड़ताल के चलते पूरे राज्य में अंधेरा छा जाने की स्थिति पैदा हो गयी है। वहीं तेदेपा प्रमुख चंद्रबाबू नायडू के अनशन का आज दूसरा दिन है जबकि वाईएसआर प्रमुख जगनमोहन रेड्डी का चौथा दिन है।
केंद्र सरकार के फैसले के विरोध में राज्य के बिजली विभाग के कर्मचारियों की हड़ताल से हालात बेकाबू हो गए हैं। इस हड़ताल के कारण रायलसीमा और तटवर्ती आंध्र क्षेत्रों के अधिकांश हिस्सों में बिजली आपूर्ति ठप्प होती जा रही है और कई ट्रेनें भी रद्द करनी पड़ीं।
सीमांध्र के सभी 13 जिलों में बिजली कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने के कारण विद्युत उत्पादन और वितरण पूरी तरह ठप्प रहा और क्षेत्र के दर्जनों कस्बे और सैकड़ों गांव कल दूसरे दिन भी अंधेरे में डूबे रहे। किसी तरह की आपात व्यवस्था न होने के कारण अस्पतालों में मरीजों को बेहद कठिनाई से गुजरना पड़ रहा है, जबकि कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई।
कर्मचारियों ने तब तक हड़ताल समाप्त करने से इनकार कर दिया जब तक कि केंद्र सरकार यह आश्वासन न दे दे कि राज्य का विभाजन नहीं होगा। वहीं आंध्र प्रदेश विभाजन के विरोध में हैदराबाद में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी प्रमुख जगनमोहन रेड्डी का अनशन आज चौथे दिन भी जारी है। वहीं तेलुगू देशम पार्टी प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू ने कल से नई दिल्ली में अनशन शुरू किया। उन्होंने कांग्रेस पर तेलंगाना मसले को लेकर राजनीति खेलने का आरोप लगाया। नायडू ने हालांकि यह साफ नहीं किया कि वह पृथक तेलंगाना के पक्ष में हैं या संयुक्त आंध्र प्रदेश के पक्ष में। उन्होंने सिर्फ यह कहा कि हम दोनों क्षेत्रों के लोगों के लिए न्याय चाहते हैं।
नायडू ने कहा कि कांग्रेस पार्टी पूरी तरह राजनीति खेल रही है। उन्हें आम आदमी की पीड़ाओं का ख्याल नहीं है। वे अधिकतम वोट जुटाना चाहते हैं। इसी बीच आंध्र में बिगड़ते हालात को देखते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन की संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया जा सकता। सहायक सॉलिसिटर जनरल ने आंध्र उच्च न्यायालय को यह जानकारी दी है कि अगर कानून-व्यवस्था के फेल होने की रिपोर्ट राज्य सरकार की तरफ से आती है तो केन्द्र यहां राष्ट्रपति शासन लगाने पर भी सोच सकता है।​ अदालत ने एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान ये पूछा था कि आंध्र के बंटवारे के बाद राज्य में जारी सकंट पर केन्द्र के द्वारा क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

Updated : 2013-10-08T05:30:00+05:30
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