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दुष्कर्म पीड़िता के मित्र ने उठाये पुलिस के रवैये पर सवाल

दुष्कर्म पीड़िता के मित्र ने उठाये पुलिस के रवैये पर सवाल
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नई दिल्ली | देश को हिला देने वाले दिल्ली दुष्कर्म मामले में इकलौता चश्मदीद ने पहली बार चुप्पी तोड़ी है। निजी चैनल से बातचीत में पीड़िता के दोस्त ने कहा कि काश मैं उसे बचा पाता। पीड़िता की भी अंतिम इच्छा थी कि दरिंदों को फांसी की बजाय जिंदा जलाया जाना चाहिए। युवक ने कहा कि जब दरिंदों ने उसे और युवती को बस से फेंक दिया था तो उसने वहां से गुजर रहे कई लोगों को रोकने की कोशिश की, लेकिन लोग उन्हें देखकर भी गुजरते रहे। 25 मिनट की कोशिशों के बाद एक शख्स वहां रुका। जबकि पीसीआर वैन को मौके पर पहुंचने में 45 मिनट लग गए। वहां दिल्ली पुलिस की तीन पीसीआर वैन पहुंचीं और इसके बाद पुलिस वाले इस बहस में उलझे रहे कि घटनास्थल किस थाने के तहत आता है, जबकि मेरी मित्र गंभीर हालत में सड़क पर पड़ी थी। युवक ने बताया कि बलात्कार के बाद आरोपी युवती को बस से कुचलना चाहते थे। बाद में हमने किसी तरह पुलिस को इसकी सूचना दी, पर पुलिस भी करीब आधे घंटे तक आपस में उलझी रही। उन्होंने कहा कि जब हमलोग सफदरजंग अस्पताल पहुंचे तो किसी ने उन्हें कंबल तक नहीं दिया। पुलिस के रवैये पर सवाल उठाते हुए उसने कहा कि जब युवती इतनी गंभीर रूप से जख्मी थी तो उन्हें पास के किसी निजी अस्पताल में क्यों नहीं भर्ती कराया गया? युवक ने कहा कि यदि यह मामला मीडिया नहीं उछालता तो यह भी एक आम केस की तरह दब जाता। इस घटना के बाद उसने हर समय पुलिस की मदद की। युवक ने बलात्कार जैसे मामलों में कानून में बदलाव की वकालत की। उसने कहा कि जब हर कोई जानता है कि ‌दरिंदों ने युवती के साथ जघन्य अपराध किया तो फिर अदालती कार्यवाही क्यों? उल्लेखनीय है कि युवती और उसका मित्र एक मॉल में फिल्म देखने के बाद मुनिरका बस स्टैंड पहुंचे थे। यहां से वह उस बस में सवार हो गए, जिसमें पहले से मौजूद छह हैवानों ने युवती के साथ गैंगरेप किया और उसे गंभीर चोट पहुंचाईं। उन्होंने साथी युवक को भी पीटा और बाद में दोनों को चलती बस से सड़क पर फेंक दिया। बाद में युवती की इलाज के दौरान सिंगापुर के अस्पताल में मौत हो गई थी।

Updated : 2013-01-05T05:30:00+05:30
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