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बीएमडब्‍ल्‍यू केस: संजीव नंदा को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत

नई दिल्‍ली : सर्वोच्च न्यायालय ने बीएमडब्ल्यू मामले में संजीव नंदा की जेल की सजा पांच साल से कम करके दो साल करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा है। बीएमडब्‍ल्‍यू हिट एंड रन केस में शुक्रवार को आरोपी संजीव नंदा को राहत मिल गई है। शीर्ष कोर्ट ने आरोपी संजीव नंदा की सजा नहीं बढ़ाई है। कोर्ट ने संजीव को दो साल तक समाजसेवा करने के लिए निर्देश दिया है। इसके अलावा, कोर्ट ने 50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

सर्वोच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति दीपक वर्मा व न्यायमूर्ति केएस राधाकृष्णन की खंडपीठ ने कहा कि नंदा को दो साल की सामुदायिक सेवा देनी होगी, यदि वह ऐसा करने में असफल रहते हैं तो उन्हें एक साल के साधारण कारावास की सजा दी जाएगी। न्यायालय ने सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय से दो महीने के अंदर सामुदायिक सेवा का वह क्षेत्र तय करने के लिए कहा है, जहां नंदा से उनकी सेवाएं देने के लिए कहा जाएगा।

न्यायालय ने नंदा को केंद्र सरकार के पास 50 लाख रुपये की राशि जमा कराने के लिए कहा है। इस राशि से 1999 के सड़क हादसे के प्रभावितों को मदद के लिए एक कोष बनाया जाएगा।

अदालत ने दुर्घटना के बाद नंदा के दुर्घटनास्थल से भाग जाने को निंदनीय करार दिया है। न्यायालय ने कहा कि नंदा ने दुर्घटना का शिकार बने लोगों की जान बचाने की बजाए खुद की सुरक्षा पर ध्यान दिया। निचली अदालत ने नंदा को दोषी मानते हुए उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 304 के भाग ए (जल्दबाजी में लापरवाहीपूर्ण तरीके से वाहन चलाने) के तहत सजा सुनाने की बजाए धारा 304 के भाग दो (गैर इरादतन हत्या) के तहत पांच साल के कारावास की सजा सुनाई थी।

नंदा जनवरी 1999 में हुए बीएमडब्ल्यू 'हिट-एंड-रन' मामले में मुख्य अभियुक्त हैं। उनकी बीएमडब्ल्यू से राष्ट्रीय राजधानी में 10 जनवरी, 1999 को हुई दुर्घटना में छह लोग मारे गए थे। 

Updated : 2012-08-03T05:30:00+05:30
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