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सोशल साइटों से अरबों का बकाया वसूल करे सरकार : गोविंदाचार्य

सोशल साइटों से अरबों का बकाया वसूल करे सरकार : गोविंदाचार्य

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वाभिमान आन्दोलन के संस्थापक गोविंदाचार्य ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है$img_title कि सरकार सोशल साइटों के मालिकों से अरबों की बकाया राशि वसूल करे। उनका यह कहना है कि फेसबुक, गुगल और इस तरह की तमाम और नेटवर्किंग साइट भारत में अपने कारोबार से मोटा मुनाफा कमा रही हैं। गोविंदाचार्य ने कहा कि दिल्ली के हाईकोर्ट मे उनकी दी हुई विस्तृत रिट याचिका के बावजूद भी सरकार इन बेबसाइटों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं कर रही है। सरकार कार्यवाही के बदले उन्हें अनुचित लाभ पहुंचा रही है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार देश की जनता और यहां कि कंपनियों से मौका पाते ही किसी ने किसी बहाने से कर वसूली के लिए तत्पर रहती है। वहीं सरकार अमेरीकी कंपनियों को देश लूटने की खुली छुट दे रखी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने गोविंदाचार्य की दी गई रिट याचिका पर सुनवाई करने के बाद सरकार और सोशल नेटवर्किंग साइट्स को नोटिस जारी किया है। गोविंदाचार्य ने अपने रिट याचिका में मांग की है कि सोशल साइट्स पर गुमनाम सदस्यों की सेवाएं तुरंत बंद की जाएं क्योंकि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा पर बहुत बड़ा खतरा पैदा हो गया है। असम हिंसा में पूर्वोत्तर लोगों के विस्थापन और पलायान जिस प्रकार करवाया गया उसके बाद यह सारी जानकारियां खुलकर सामने आयी है। इनके खिलाफ कोई ठोस कदम उठाने के बदले सरकार ने अमेरिकी अधिकारियों के सामने मदद की गुहार लगाई क्योंकि ज्यादातर सोशल साइट्स की सर्वर अमेरिका में मौजूद हैं। अमेरिकी अधिकारी मदद करने के बदले भारत सरकार को नसीहत दी कि वो इंटरनेट की आजादी का सम्मान करें। गोविंदाचार्य ने कहा कि प्रधानमंत्री के नाम से चल रहे फर्जी टिवट्रर एकांउट को अभी तक बंद नहीं करवाया गया है जबकि सूचना एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री मिलिंद देवड़ा का असली टिवट्रर एकाउंट ट्विटर द्वारा बंद कर दिया गया यह बड़े अफसोस की बात है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति का किसी भी साइट्स पर एकाउंट खोलने से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी ले लेनी चाहिए ,बिना जानकारी के किसी का भी एकाउंट नहीं खोलनी चाहिए। गोविंदाचार्य की याचिका के मुताबिक भारत में इन सब के खिलाफ कानूनों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने ब्लैकबेरी संचालक रिम को भारत में सर्वर लगाने के लिए सरकार द्वार विवश किया गया मुद्दा का भी उदाहरण दिया। उनका कहना है कि सोशल साइट्स भी दूरसंचार मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आती है इसलिए कानूनी रूप से यह जिम्मेदारी बनती है कि उपभोक्ता को  अपनी सेवा देने से पहले वे उपभोक्ता के बारे में सारी जानकारियां एकत्र कर ले। साथ ही वे 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अपने साइट पर आने कि इजाजत ने दें। गोविंदाचार्य ने कहा कि वो जिन बातों को उठा रहे हैं, वे बातें राजनीतिक नहीं है बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा सवाल है।साथ ही अगर अमरीकी कंपनियों को यदि भारतीय कानूनो  का पालन करवाया गया तो इससे न केवल भारत सरकार की आमदनी बढेगी बल्कि भारत में रोजगार के अवसर भी बढेंगे। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि राजनैतिक और वैचारिक असहमति को महत्व न देते हुए इस मुद्दे पर राष्ट्रीय सहमति बनाए जाने की आवश्यकता है।


Updated : 2012-08-29T05:30:00+05:30
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