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भारत को दहलाने की पूरी तैयारी में था सैयद जबीउद्दीनपुलिस की गिरफ्त में कैसे आया जबीउद्दीन, जानिए पूरी कहानी

भारत को दहलाने की पूरी तैयारी में था सैयद जबीउद्दीनपुलिस की गिरफ्त में कैसे आया जबीउद्दीन, जानिए पूरी कहानी
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नई दिल्ली। तीन साल से पीछा कर रहीं सुरक्षा एजेंसियों को आखिरकार ल$img_titleश्कर-ए-तैयबा के कथित आतंकवादी और वर्ष 2008 में मुंबई हमले को अंजाम देने वाले 10 आतंकवादियों को हिन्दी सिखाने वाले सैयद जबीउद्दीन उर्फ अबू हमजा को गिरफ्तार करने में सफलता मिल गई है। जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी...
मुंबई में 26/11 हमले का प्रमुख आरोपी अबू हमजा को सऊदी अरब ने भारत को सौंपा है। भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने इस बात की पुष्टि भी की है।
सऊदी अरब में DNA टेस्ट की जांच के बाद हमजा को भारत को सौंपा गया। वहीं खबरें ये भी आई हैं कि हमजा को रिहा करने के लिए पाक ने सऊदी अरब पर दबाव भी डाला था, हालांकि इस का सऊदी अरब पर कुछ खास प्रभाव नहीं पड़ा। वहीं दिल्ली पुलिस अबू हमजा से लगातार पूछताछ कर रही है। इस दौरान हमजा ने कई राज भी खोले हैं। सूत्रों के मुताबिक हमजा ने कबूल किया है कि वो इंडियन मुजाहिद्दीन के सरगना इकबाल भटकल से भी लगातार संपर्क में था। सूत्रों के मुताबिक उसने ऐसे कई खुलासे किए हैं, जिससे लश्कर के खौफनाक मंसूबों का पता चला है। अबू हमजा को सऊदी अरब की पुलिस ने गिरफ्तार किया था। और उसे वहां से विमान के जरिए भारत भेजा गया। दरअसल हमजा सऊदी अरब में छुपा था। भारतीय एजेंसियों को इसकी भनक मिली और फिर शुरू हुआ सऊदी अरब के साथ लंबी बातचीत का सिलसिला।
इस में करीब एक साल का वक्त लगा, लेकिन मुंबई हमले के इस मास्टरमाइंड जिसकी भारत के खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों ने सिर्फ आवाज़ सुनी थी, को पहचानना सान नहीं था। एक इंटेलिजेंस अधिकारी के मुताबिक हमजा की पहचान करने में डीएनए टेस्ट की भी मदद ली गई। पाकिस्तान ने सऊदी अरब सरकार पर राजनयिक दबाव डाल कर उसे पाकिस्तान लाने की भी कोशिश की। वर्ष 2005 से लापता जबीउद्दीन लश्कर-ए-तैयबा का तब से चहेता हो गया था, जब 2002 के गुजरात दंगों के बाद प्रतिबंधित सिमी ने उसका ब्रेन वाश कर दिया। उसने बीड़ में भारतीय तकनीकी संस्थान आईटीआई से प्रशिक्षण लिया था। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने जबीउद्दीन के मामले का अध्ययन करने के लिए बहुत से गिरफ्तार आतंकवादियों से पूछताछ की थी, जिसमें पता चला कि वह पाकिस्तान के कराची और पाक अधिकृत कश्मीर के आतंकी शिविरों में है तथा वह महाराष्ट्र में हमले करने की आतंकी समूह की योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा भी पूछताछ के लिए जबीउद्दीन को हिरासत में लेने की संभावना है। सूत्रों ने बताया कि विदेशी खुफिया एजेंसियों ने जबीउद्दीन का पता लगाने में मदद की जो दिल्ली, महाराष्ट्र और गुजरात के आतंकी हमलों से जुडे़ कई मामलों में वांछित था। जांच से जुडे़ अधिकारियों ने बताया कि उसने लश्कर आतंकवादियों से कहा कि वे मीडिया को बताएं कि यह हमला तो ट्रेलर है, असली फिल्म अभी आनी बाकी है। पकडे़ गए टेप से जबीउद्दीन को प्रशासन जैसे हिंदी शब्द भी बोलते सुना गया। वह आतंकवादियों को निर्देश दे रहा था कि वे अपनी पाकिस्तान की पहचान को छिपा कर रखें और खुद को हैदराबाद के टोली चौक का डेक्कन मुजाहिदीन बताएं। भारत ने उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कार्नर नोटिस जारी कराया था। पूछताछ के दौरान उसने कराची नियंत्रण कक्ष के बारे में विस्तार से बताया, जो मुंबई हमले की निगरानी कर रहा था। मुंबई हमले के एकमात्र जीवित पकड़े गए आतंकवादी अजमल कसाब ने भी विशेष अदालत के समक्ष अपने बयान में जबीउद्दीन की मौजूदगी की बात स्वीकारी है। उसने अदालत को बताया कि जबीउद्दीन ने दस आतंकवादियों को हिंदी बोलने का प्रशिक्षण दिया था। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने कई गिरफ्तार आतंकवादियों से पूछताछ की ताकि जिन्दाल के बारे में जानकारी हासिल हो सके। पूछताछ में ही पता चला कि वह कराची और पाक अधिकृत कश्मीर के आतंकवादी शिविरों में काम कर रहा था और भारत में हमले करने की योजनाओं में लश्कर के लिए महत्वपूर्ण व्यक्ति था।

Updated : 2012-06-26T05:30:00+05:30
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