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बोफोर्स के बाद पहली बार सेना को नई तोपें

बोफोर्स के बाद पहली बार सेना को नई तोपें
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$img_titleनई दिल्ली।
सेनाओं को हथियारों की कमी पर सुस्ती और अनदेखी के आरोप झेल रहे रक्षा मंत्रालय ने 7000 करोड़ से अधिक के खरीद सौदों को मंजूरी दे दी। 1986 में बोफोर्स तोप सौदे पर बवाल के बाद अमेरिका से 145 होवित्जर तोपों की खरीद के 26 साल से अटके प्रस्ताव पर रक्षा मंत्रालय ने मुहर लगा दी है। इसके तहत करीब 3000 करोड़ रुपये की लागत से एम-777 तोपें खरीदी जाएंगी।


रक्षा मंत्री एके एंटनी की अगुवाई में रक्षा खरीद परिषद की बैठक में अमेरिका से सीधी सैनिक खरीद [सरकारों के बीच होने वाले सैनिक सौदे] के रास्ते खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। नई तोपों के अलावा वायुरक्षा प्रणाली, कैडेट प्रशिक्षण पोत निर्माण से लेकर टी-90 टैंकों के लिए जरूरी उपकरणों की खरीद के प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी गई। 155 मिमी और 39 कैलीबर की तोपों का प्रयोग अरुणाचल प्रदेश के अलावा लद्दाख के सीमावर्ती इलाकों में किया जाना है। 1986 के बाद देश में पहली बार तोपों की खरीद होने जा रही है। इसी तरह वायु रक्षा प्रणाली की कमियों को दूर करने के लिए 3000 करोड़ रुपये की लागत से एल-70 रडार के नए संस्करण खरीदे जाने हैं।

सूत्रों के मुताबिक बैठक में रक्षा सेनाओं के उन सभी उपकरणों की खरीद पर जोर था जिन्हें लेकर बीते दिनों संसद और उससे पहले प्रधानमंत्री के नाम सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह की चिट्ठी में चिंताएं उठी थीं। पत्र में सेनाध्यक्ष ने कहा था कि वायु रक्षा प्रणाली के अधिकांश उपकरण पुराने हो चले हैं। हालांकि, रक्षा मंत्रालय की मंजूरी के बावजूद सेना के पास इन उपकरणों को पहुंचने में कुछ वक्त लगेगा क्योंकि इन पर अभी वित्त मंत्रालय की मंजूरी और केंद्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा संबंधी समिति की अनुमति के बाद सौदे परवान चढ़ सकेंगे।

गत दिनों रक्षा मंत्रालय की संसदीय समिति की रिपोर्ट में भी तीनों सेनाओं के पास सैनिक साजो-सामान की कमी की बात कही गई थी। इस पर मंगलवार को संसद में एंटनी ने कहा था कि सरकार सैन्य आधुनिकीकरण पर आगे बढ़ रही है।

Updated : 2012-05-12T05:30:00+05:30
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